श्रम संहिता, कृषि कानून और बिजली विधेयक को वापस लेने की उठाई मांग
केंद्र सरकार पर लगाया मजदूरों; कर्मचारियों, आम जनता के शोषण का आरोप
शिमला। सीटू राज्य कमेटी ने बुधवार को श्रम संहिता, बिजली संशोधित विधेयक और केंद्रीय बजट के खिलाफ प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। राजधानी शिमला के उपायुक्त ऑफिस के बाहर राज्य स्तरीय प्रदर्शन में सीटू ने केंद्र सरकार के बजट को मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी करार दिया। आरोप लगाया कि बजट गरीब विरोधी है। केवल पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए बजट तैयार किया गया। मजदूर यूनियन ने चेताया कि मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं, बिजली विधेयक और कृषि कानूनों को अगर वापस न लिया तो सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज होगा।
सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों के साथ खड़ी हो गई है। आर्थिक संसाधनों को आम जनता से छीनकर अमीरों के हवाले करने के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। मजदूर विरोधी चार श्रम संहिता, तीन कृषि कानून, बिजली विधेयक पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से ही बनाए गए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नारे की आड़ में मजदूर विरोधी संहिताओं को अमलीजामा पहनाकर यह बजट इंडिया ऑन सेल का बजट है। महिला सशक्तीकरण और नारी उत्थान का नारा देने वाली केंद्र सरकार ने गरीबों और महिलाओं को इस बजट में आर्थिक तौर पर कमजोर किया है। सरकार ने मनरेगा के बजट में 41 प्रतिशत कटौती कर दी है। आंगनबाड़ी कर्मियों के बजट में सरकार ने 30 प्रतिशत कटौती कर दी है। मिड डे मील योजना के बजट में 1400 करोड़ रुपये की कटौती हुई है। प्रदर्शन में सीटू नेता जगत राम, डॉ. कुलदीप तंवर, डॉ. ओंकार शाद मौजूद रहे।