शिमला जिले में शीतकालीन सत्र वाले नए सीबीएसई बने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिले और पढ़ाई शुरू हो गई है लेकिन इन स्कूलों में अभी तक न तो सीबीएसई बोर्ड की किताबें पहुंची हैं न ही अभी तक बोर्ड के तहत शिक्षक तैनात हुए हैं। इसके कारण छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। विभाग ने फिलहाल सीबीएसई में शामिल हुए इन स्कूलों में एचपी बोर्ड के पाठ्यक्रम को पढ़ाना शुरू कर दिया है। इसको लेकर तर्क दिया जा रहा है कि दोनों पाठ्यक्रम में ज्यादा अंतर नहीं है।
प्रदेश सरकार ने शिमला जिले के 22 सरकारी स्कूल सीबीएसई बोर्ड में शामिल किए हैं। इनमें से ज्यादातर स्कूल शीतकालीन सत्र वाले हैं। इन स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है। कई स्कूलों में दाखिलों के साथ पढ़ाई भी शुरू हो गई है। जिन स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई है वहां अभी विद्यार्थियों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का ही पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है और स्कूलों में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के तहत तैनात शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। इसके कारण विद्यार्थियों व अभिभावकों को पढ़ाई प्रभावित होने का डर सता रहा है। उधर, विभाग का दावा है कि बच्चों की पढ़ाई पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। विभाग जल्द ही स्कूलों में सीबीएसई बोर्ड की किताबें उपलब्ध करवाएगा।
सीबीएसई में शामिल हुए स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया चली हुई है। दोनों बोर्ड एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को फाॅलो करते हैं। दोनों के पाठ्यक्रम में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम की किताबें ही पढ़ाई जा रही हैं। बच्चों को जल्द ही किताबें उपलब्ध करवा दी जाएंगी। -लेखराज भारद्वाज, उपनिदेशक शिक्षा विभाग