हिमाचल प्रदेश के नगर निगम शिमला में जनप्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल पूरा होते ही अब प्रशासक व्यवस्था संभालेगा। नगर निगम के 36 साल के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब सरकार यहां प्रशासक की तैनाती करेगी। सूत्रों के अनुसार किसी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को प्रशासक का जिम्मा सौंपने की तैयारी है। नगर निगम के चुनाव समय पर न होने के कारण सरकार को प्रशासन की तैनाती करनी पड़ रही है। फरवरी महीने तक नगर निगम के चुनाव की पूरी तैयारी चल रही थी।
लेकिन जैसे ही सरकार ने वार्डों के पुनर्सीमांकन का फैसला लिया कि इस पर विवाद खड़ा हो गया। शहर में दो वार्डों की सीमाएं बदलने को लेकर पार्षदों ने आपत्तियां जताई थीं जिसकी सुनवाई में वक्त लग गया और चुनाव टालने पड़ गए। ऐसे में चुनाव होने तक प्रशासक नगर निगम की व्यवस्था संभालेगा। हालांकि अभी तय नहीं किया है कि किसे यह जिम्मेदारी दी जाएगी। नगर निगम चुनाव में अभी करीब डेढ़ से दो महीने लग सकते हैं। एक प्रशासक कब से और किस तरह व्यवस्था चलाएगा, इस पर आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
10 लाख से अधिक राशि के कार्यों की प्रशासक देगा मंजूरी
राजधानी में नगर निगम में जनप्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही अब सदन की मासिक बैठकें भी नहीं हो पाएंगी। ऐसे में 10 लाख रुपये से अधिक राशि के निर्माण कार्यों को प्रशासक ही मंजूरी देगा। अब तक सदन से इन पर मंजूरी ली जाती थी। नगर निगम चुनाव टलने के कारण शहर में बड़े निर्माण कार्यों को जारी रखने के लिए सरकार को जल्द प्रशासक की तैनाती करनी पड़ सकती है। नियमों के अनुसार शहर में दस लाख रुपये तक के कामों की मंजूरी नगर निगम आयुक्त देते हैं। प्रशासक की तैनाती होने पर भी आयुक्त इसी तरह काम करते रहेंगे। वहीं 10 लाख रुपये से अधिक के कामों के प्रस्ताव प्रशासक के पास जाएंगे।
प्रशासक की मंजूरी पर ही यह काम शुरू किए जा सकेंगे, यानि जो बड़े प्रस्ताव सदन से पास करवाए जाते थे वह अब प्रशासक पारित करेंगे। हालांकि, नगर निगम में पहली बार ऐसी स्थितियां बनी हैं जब प्रशासक तैनात करना पड़ा है। ऐसे में इसके कामकाज को लेकर पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं है। नगर निगम कार्यालय में सोमवार को भी चर्चाएं रहीं कि आखिर सरकार किसे प्रशासक तैनात करने जा रही है। सभी को इस बारे में सरकार की अधिसूचना का इंतजार है। प्रशासक कहां बैठेगा, इसे लेकर भी चर्चाएं जोरों पर है। टाउनहॉल में नगर निगम महापौर और उप महापौर के बैठने की ही अनुमति है। ऐसे में प्रशासक टाउनहॉल में नहीं बैठ सकेगा।
पार्षद न होने पर भी बनते रहेंगे प्रमाण पत्र
नगर निगम प्रशासन का कहना है कि मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षदों के न होने के बावजूद शहर में लोगों के प्रमाण पत्र पहले की तरह बनते रहेंगे। लोग पटवारी के जरिये यह प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। अतिरिक्त आयुक्त बाबूराम शर्मा ने बताया कि कार्यकाल खत्म होने के बाद पार्षद अब किसी तरह के प्रमाण पत्र जारी नहीं कर पाएंगे। लोग पटवारी के पास जाकर स्थाई पत्ते जैसे प्रमाण पत्र बनवा सकते हैं। आय, जीवन जैसे प्रमाण पत्र तहसीलदार पहले की तरह बनाते रहेंगे।