करीब 24 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित किन्नर कैलाश की पवित्र यात्रा इस बार नहीं होगी। एक अगस्त से शुरू होने वाली यात्रा पर इस बार जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है।
यह फैसला बारिश, भारी बर्फबारी, खराब रास्तों और ग्लेशियरों से हादसों की आशंका के चलते लिया गया है। प्रशासन के इस फैसले से शिव भक्त निराश हैं। देव समाज ने भी पर्यावरण और जड़ी-बूटियों को हो रहे नुकसान के चलते इस बार यात्रा पर रोक लगाने की मांग उठाई थी।
किन्नर कैलाश सदियों से हिंदू और बौद्ध धर्म के अनुयायियों का आस्था का केंद्र रहा है। यह यात्रा 11 दिन तक चलती है। हालांकि श्रद्धालु एक महीना तक यात्रा पर चले रहते हैं।
गुरुवार को किन्नर कैलाश यात्रा को लेकर एसडीएम कल्पा अवनिंद्र शर्मा की अध्यक्षता में बैठक का आयोजन किया गया। इसमें पुलिस विभाग, होमगार्ड, अग्निशमन, राजस्व, वन विभाग, प्रधान तांगलिंग, प्रधान रिब्बा और देव समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
देव समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि किन्नर कैलाश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में आने से मल मूत्र, खानपान की सामग्री, प्लास्टिक से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। कई लोग शराब का सेवन करते हैं।