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लिटफेस्ट का समापनः अनुपम खेर बोले-भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता

Mon, 09 Oct 2017 01:37 PM IST
राकेश शर्मा/अमर उजाला, कसौली (सोलन)
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लिटफेस्ट का छठा संस्करण रविवार को पूरा हो गया। खट्टी-मीठी यादों और तीखे शब्द वाणों के साथ चले लिटफेस्ट में अनुपम खेर सबसे यादगार लम्हे अगले एक साल के लिए छोड़ गए। उन्होंने रविवार को मंच संभाला तो सभी टकटकी लगाए उनकी बातों को सुनते रहे। 
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अनुपम ने करीब एक घंटा थियेटर से बॉलीवुड और फिर हॉलीवुड तक की अपनी यादें कसौली में साझा कीं। अनुपम खेर ने ‘भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता’ से अपनी बात शुरू की। उन्होंने कहा कि अभिनेता कभी जन्म से नहीं होता वो तो तराशा जाता है। 

बचपन में उन्हें पढ़ाई में खास दिलचस्पी नहीं थी। शिमला में थियेटर से जुड़े लेकिन शोहरत नहीं मिली। पहली बार हार मिली तो पिता ने फूल भेंट किए और जब दसवीं में फेल हुए तो रेस्तरां में ले जाकर खाना खिलाया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति सिर्फ हार से डरता है और उनके पिता ने हार का डर ही उनके मन से निकाल दिया।
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डेढ़ माह तक रेलवे स्टेशन की खाक छानते रहे

बकौल अनुपम खेर वे 3 जून 1981 को किस्मत आजमाने मुंबई गए और करीब डेढ़ माह तक रेलवे स्टेशन व शहर की गलियों की खाक छानते रहे। जब उन्हें हार सामने दिखने लगी तो उन्होंने उस समय अपने दादा को एक पत्र लिखा और वापस शिमला आने की बात कही।

अनुपम के अनुसार उनके दादा ने अपने पत्र के जवाब में ‘भीगा हुआ आदमी बारिश से नहीं डरता’ लिखकर उन्हें भेजा। इन शब्दों ने उनमें हिम्मत बढ़ा दी, जिसके बाद वे दोबारा मकसद हासिल करने में डट गए।

बकौल अनुपम उन्हें महेश भट्ट ने पहली बार ‘सारांश’ के लिए साइन किया और करीब छह माह तक बिना रुके अभ्यास करते रहे। लेकिन छह माह बाद उन्हें महेश भट्ट ने फोन करके उनका किरदार संजीव कुमार को देने की बात कही।

जिस पर उन्होंने महेश भट्ट के घर जाकर रोल के लिए जिरह की और बाद में उन्हें श्राप देकर घर से निकल आए। लेकिन बाद में महेश भट्ट ने उन्हें अपनी फिल्म सारांश में रोल दे दिया। उन्होंने कहा कि हिम्मत कभी नहीं हारनी चाहिए।

यदि वह शिमला लौट आए होते तो आज उन्हें कोई नहीं पहचानता। संजीव कुमार ने सारांश में उनके अभिनय को देखकर उनकी तारीफ की थी। अनुपम खेर ने बताया कि उन्होंने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक हफ्ते बाद 57 फिल्में साइन कर डाली।  
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सुरक्षा तंत्र और पुस्तक बिक्री पर मंथन  

कसौली में लिटफेस्ट के आखिरी दिन मिहिर बोस व सुमंत्रा बोस ने द ट्रू स्टोरी ऑफ द मोस्ट रिमार्केवल इंडियन स्पाई पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आजादी के पहले और बाद में देश के सुरक्षा तंत्र की बारीकियां और गुप्तचरों की

बात श्रोताओं के सामने रखी। लेखक अश्विन सांघी ने पुस्तक लिखने और उसे बेचने की कला श्रोताओं से साझा की। अश्विन ने बताया कि तीन चीजें किसी भी किताब को चर्चित करती हैं। पहला उसे लिखने से पूर्व ग्राफ बनाना, एक चैप्टर पूरा होने पर उसे हुक कर देना और तीसरा किताब के आखिर में अगली पुस्तक के बारे में जानकारी देना है।

छंब में हुई महत्वपूर्ण जंग  
कसौली में पूर्व जनरल एजेएस संधु ने 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध को लेकर प्रकाशित पुस्तक बैटलग्राउंड छंब पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि छंब पाकिस्तान और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण जगह थी। जिस पर पाकिस्तानी सेना कब्जा करना चाहती थी और हमारे जवानों ने 1971 में अपनी जान पर खेलकर यहां युद्ध लड़ा था। उन्होंने कहा कि थ्री नॉट थ्री के साथ जवान दुश्मनों पर भारी पड़े थे। उन्हें निर्देश थे कि आखिरी आदमी और आखिरी गोली तक उन्हें डटे रहना है।
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