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हिमाचल: विधानसभा प्रश्नों के जवाब देरी से देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी, सचिवों को पत्र जारी

Tue, 24 Mar 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी किए हैं। 
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हिमाचल सरकार। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विधानसभा में उठने वाले प्रश्नों के जवाब देरी से देने वाले अफसरों पर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों को पत्र जारी किए हैं। समय से जवाब तैयार करने को हर विभाग में एक नोडल शाखा बनाने को कहा गया है। निदेशालय, बोर्डों और निगमों को विभागों के माध्यम से ही जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तय समय सीमा में जवाब न देने वाले विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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पत्र में कहा गया है कि पहले भी 20 फरवरी, 2020 को इस मुद्दे पर निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कई विभाग समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं करवा रहे हैं। इसके चलते विधानसभा सत्र के दौरान कई प्रश्नों के उत्तर लंबित रह जाते हैं, जिससे सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में तो जवाब वर्षों तक लंबित रहने के भी उदाहरण सामने आए हैं। सरकार ने व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए स्पष्ट किया है कि संबंधित प्रशासनिक विभाग ही जवाब तैयार करने के लिए पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे।

उन्हें अपने अधीन आने वाले निदेशालयों और कार्यालयों से समय पर जानकारी जुटाकर कार्मिक विभाग को जवाब भेजना होगा। जिन विभागों में एक से अधिक शाखाएं कार्यरत हैं, वहां एक शाखा को नोडल शाखा के रूप में नामित किया जाएगा। यह नोडल शाखा सभी शाखाओं से जानकारी एकत्र कर समेकित उत्तर तैयार करेगी। समन्वय के लिए संबंधित अनुभाग अधिकारी को नोडल सेक्शन अधिकारी नियुक्त करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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सरकार ने पाया है कि इन निर्देशों का कई विभागों द्वारा सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे विधानसभा सत्र के दौरान जवाब देने में देरी हो रही है। इस पर मुख्यमंत्री ने गंभीर नाराजगी जताई है। पत्र के माध्यम से चेतावनी दी गई है कि अब सभी प्रशासनिक विभाग निर्धारित समय के भीतर समेकित उत्तर अनिवार्य रूप से भेजेंगे। यदि किसी विभाग की ओर से इसमें लापरवाही बरती जाती है, तो उसका मामला सीधे मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा और संबंधित विभाग के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
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