डॉक्टर आपात स्थिति में किसी मरीज को एफडीएल की सूची से बाहर की दवा लिखता है तो उसे पर्ची पर इसका कारण भी लिखना होगा। औचक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग को कारण सही लगा तो डॉक्टर की लिखी दवा को एफडीएल सूची में शामिल किया जा सकता है। सरकार ने 330 तरह की दवाएं जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इस दवा को इस सूची में जोड़ लिया जाएगा।
जिला अस्पताल में 330 और सब सेंटर में 43 दवाएं होना जरूरी
एफडीएल में 330 तरह की स्वास्थ्य संस्थानों में रखने के निर्देश हैं। इनमें कैंसर रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाओं को छोड़कर अन्य सभी बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। इनमें 330 प्रकार की सभी दवाएं जिलास्तरीय अस्पताल में होना अनिवार्य है। सिविल अस्पताल और सीएचसी में 216, पीएचसी में 106 और हेल्थ सब सेंटर में 43 प्रकार की दवाएं रखनी होंगी। ये दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी।
जेनेरिक दवाएं बजट और सेहत के लिए बेहतर
स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर बलदेव ठाकुर ने बताया कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारियों को जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल में डॉक्टर सिर्फ जेनेरिक दवाएं ही लिखें। ये दवाएं मरीजों के बजट और उनकी सेहत दोनों के लिए बेहतर हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन आर दरोच ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशक के दिशा-निर्देश के बाद जिले में काम शुरू हो गया है। कभी भी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया जा सकता है।