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ब्रांडेड दवा लिखने वाले डॉक्टरों की होगी छुट्टी, पर्चियों का निरीक्षण करेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम

Sat, 03 Feb 2018 11:52 AM IST
राकेश शर्मा
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मरीज की पर्ची पर ब्रांडेड दवा लिखने वाले डॉक्टर की छुट्टी हो सकती है। उसे एक जगह नहीं, बल्कि अस्पताल के एमएस या ब्लॉक अधिकारी से स्वास्थ्य निदेशक तक को जवाब देना होगा। स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेगी।

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इस दौरान डॉक्टर की लिखी पर्चियों का निरीक्षण होगा। विभाग ने तय किया है कि दस पर्चियों से कम का निरीक्षण कोई भी अधिकारी नहीं करेगा। निरीक्षण में यदि डॉक्टर गलत पाया गया तो उसे तत्काल नोटिस भेजा जाएगा। डॉक्टर ने जेनेरिक की जगह ब्रांडेड दवा लिखी होगी तो उसकी नौकरी पर बात बन सकती है। 

अस्पताल के स्टोर में विकल्प होने के बावजूद बाहर की दवा लिखी गई तो डॉक्टर को बख्शा नहीं जाएगा। डॉक्टर किसी मरीज को परीक्षण करवाने के लिए कहता है तो भी उसे पर्ची में रोग का जिक्र करना होगा। परीक्षण पूर्ण होने के बाद ही मरीज का उपचार शुरू करना पड़ेगा।
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पर्ची पर डॉक्टर को जेनेरिक दवा लिखनी होगी, वह भी साफ शब्दों में। जो डॉक्टर बड़े अक्षरों में दवाई लिखेगा, स्वास्थ्य विभाग उसे बेहतर अंक देकर सम्मानित करेगा। लगातार नेगेटिव मार्किंग डॉक्टर का भविष्य खराब कर सकती है। मरीज का उपचार फ्री ड्रग पॉलिसी के तहत ही करना होगा।

बीएमओ, एमएस और सीएमओ करेंगे औचक निरीक्षण
डॉक्टर पर नजर रखने को बीएमओ, एमएस और सीएमओ की टीम जिले में काम करेगी। सभी एमएस अपने अस्पताल, बीएमओ ब्लॉक और सीएमओ जिला स्तर पर किसी भी अस्पताल, सीएचसी या पीएचसी का मुआयना करेंगे। डॉक्टर को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। ये रेशनल, सेमी रेशनल और इरेशनल हैं। विभाग इरेशनल श्रेणी के डॉक्टर पर तत्काल कार्रवाई करेगा।

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सूची से बाहर की दवा लिखने पर बताना होगा कारण

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डॉक्टर आपात स्थिति में किसी मरीज को एफडीएल की सूची से बाहर की दवा लिखता है तो उसे पर्ची पर इसका कारण भी लिखना होगा। औचक निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग को कारण सही लगा तो डॉक्टर की लिखी दवा को एफडीएल सूची में शामिल किया जा सकता है। सरकार ने 330 तरह की दवाएं जिला स्तर पर सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इस दवा को इस सूची में जोड़ लिया जाएगा।

जिला अस्पताल में 330 और सब सेंटर में 43 दवाएं होना जरूरी
एफडीएल में 330 तरह की स्वास्थ्य संस्थानों में रखने के निर्देश हैं। इनमें कैंसर रोगियों को दी जाने वाली कुछ दवाओं को छोड़कर अन्य सभी बीमारियों की दवाएं शामिल हैं। इनमें 330 प्रकार की सभी दवाएं जिलास्तरीय अस्पताल में होना अनिवार्य है। सिविल अस्पताल और सीएचसी में 216, पीएचसी में 106 और हेल्थ सब सेंटर में 43 प्रकार की दवाएं रखनी होंगी। ये दवाएं मरीजों को मुफ्त मिलेंगी।

जेनेरिक दवाएं बजट और सेहत के लिए बेहतर 
स्वास्थ्य निदेशक डॉक्टर बलदेव ठाकुर ने बताया कि जिला स्तर पर स्वास्थ्य अधिकारियों को जागरूक किया जा रहा है। अस्पताल में डॉक्टर सिर्फ जेनेरिक दवाएं ही लिखें। ये दवाएं मरीजों के बजट और उनकी सेहत दोनों के लिए बेहतर हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी सोलन आर दरोच ने बताया कि स्वास्थ्य निदेशक के दिशा-निर्देश के बाद जिले में काम शुरू हो गया है। कभी भी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया जा सकता है।
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