जेलों की हालत में सुधार तब तक संभव नहीं है, जब तक जेल महकमा सरकार की प्राथमिकता में नहीं आता। महिला कैदियों की स्थिति में सुधार को महिला स्टाफ की संख्या बढ़ाया जाना जरूरी है।
यह बात हिमाचल जेल विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में हरियाणा मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डॉ. केपी सिंह ने कही। कहा कि जेलों में जब तक व्यापक परिवर्तन नहीं किया जाएगा, तब तक स्थित ऐसी ही रहेगी।
जेलों को बजट देने का नंबर आने तक सरकार के पास खजाने खाली हो जाते हैं। ऐसे में प्राथमिकता पर जब जेलों के बारे में सोचा जाएगा तब बदलाव की शुरुआत होगी। इसमें केंद्र और राज्य दोनों को प्रयास करने होंगे।
सिर्फ पुलिस के आधुनिकीकरण के बजाय बीपीआरएंडडी को जेलों के आधुनिकीकरण के लिए बजट देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कानून और जेल मैनुअल तक में बदलाव की जरूरत है।
महिला-पुरुष दोनों को सिर्फ बंदी के बजाय उनकी जरूरतों के अनुसार देखना जरूरी है। जेलों में एनजीओ और अन्य संगठनों को जाने की छूट देनी चाहिए। जम्मू केंद्रीय कारागार की सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल ने जेल विभाग में कम से कम 10 प्रतिशत महिला स्टाफ होने की वकालत की।
कार्यशाला में गुजरात के डीजी जेल मोहन झा, हरियाणा के डीजी जेल सेलवराज, कर्नाटक के डीजी जेल एनएस मेघारिख, तेलंगाना के डीजी जेल वीके सिंह, महाराष्ट्र के डीजी जेल एसएन पांडे, पंजाब के एडीजी जेल आईपीएस सहोटा, मध्य प्रदेश के एडीजी एसके शाही व डीआईजी जेल बरेली शशि श्रीवास्ताव भी मौजूद रहे।