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समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है सकारात्मक सोच : आचार्य देवव्रत

Fri, 05 Oct 2018 09:10 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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रचनात्मक और सकारात्मक सोच ही समाज में बड़े स्तर पर बदलाव ला सकती है। इस दिशा में जिम्मेवार लोगों के प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यह बात राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने वीरवार को नालदेहरा स्थित निजी होटल में हिरासत में महिलाओं और न्याय तक पहुंच विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान कही।

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कहा कि महिलाओं को बराबर का हक देने के लिए समाज को अपने विचारों में बदलाव लाना होगा। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जहां एक व्यक्ति समाज में बदलाव और प्रेरणा का स्रोत बना है। हमें ऐसे महान व्यक्ति के पदचिह्नों पर चलना चाहिए।

कैदियों को सकारात्मक सोच का जीवन जीने के लिए मार्गदर्शन की आवश्यकता है। राज्यपाल ने इस दिशा में कारागार विभाग और विशेषकर कारागार एवं सुधारक सेवाएं विभाग के महानिदेशक सोमेश गोयल के प्रयासों सराहना की, जिन्होंने कैदियों के लिए शिक्षात्मक परियोजनाओं की पहल की है।
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उनके माध्यम से प्राकृतिक खेती करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कंडा जेल के कैदियों ने अपने आपको प्राकृतिक खेती से जोड़कर दूसरों को उदाहरण प्रस्तुत किया है। कार्यशाला के आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई दी।

इससे पहले कार्यक्रम की शुरुआत एक लघु फिल्म बिहाइंड द बार्ज का भी शुभारंभ किया। फिल्म की निर्देशक डॉ. देवकन्या ठाकुर को सम्मानित किया। इस दौरान मुख्य सचिव बीके अग्रवाल, महानिदेशक बीपीआर एंड डी एपी महेश्वरी के अलावा 14 राज्यों के 40 से ज्यादा डेलीगेट ने भाग लिया। 

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सरकार की प्राथमिकता में आने पर ही बदलेगी जेलों की तस्वीर

जेलों की हालत में सुधार तब तक संभव नहीं है, जब तक जेल महकमा सरकार की प्राथमिकता में नहीं आता। महिला कैदियों की स्थिति में सुधार को महिला स्टाफ की संख्या बढ़ाया जाना जरूरी है।

यह बात हिमाचल जेल विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में हरियाणा मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डॉ. केपी सिंह ने कही। कहा कि जेलों में जब तक व्यापक परिवर्तन नहीं किया जाएगा, तब तक स्थित ऐसी ही रहेगी।

जेलों को बजट देने का नंबर आने तक सरकार के पास खजाने खाली हो जाते हैं। ऐसे में प्राथमिकता पर जब जेलों के बारे में सोचा जाएगा तब बदलाव की शुरुआत होगी। इसमें केंद्र और राज्य दोनों को प्रयास करने होंगे।

सिर्फ पुलिस के आधुनिकीकरण के बजाय बीपीआरएंडडी को जेलों के आधुनिकीकरण के लिए बजट देना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कानून और जेल मैनुअल तक में बदलाव की जरूरत है।

महिला-पुरुष दोनों को सिर्फ बंदी के बजाय उनकी जरूरतों के अनुसार देखना जरूरी है। जेलों में एनजीओ और अन्य संगठनों को जाने की छूट देनी चाहिए। जम्मू केंद्रीय कारागार की सुपरिंटेंडेंट रजनी सहगल ने जेल विभाग में कम से कम 10 प्रतिशत महिला स्टाफ होने की वकालत की।

कार्यशाला में गुजरात के डीजी जेल मोहन झा, हरियाणा के डीजी जेल सेलवराज, कर्नाटक के डीजी जेल एनएस मेघारिख, तेलंगाना के डीजी जेल वीके सिंह, महाराष्ट्र के डीजी जेल एसएन पांडे, पंजाब के एडीजी जेल आईपीएस सहोटा, मध्य प्रदेश के एडीजी एसके शाही व डीआईजी जेल बरेली शशि श्रीवास्ताव भी मौजूद रहे।
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