हिमाचल के हरसौर गांव के बांकू राम के बेटे का कमाल देखिए। कंधे में चोट लगने के बावजूद विजय कुमार ने इचियोन एशियाड खेलों में पिस्टल शूटिंग में रजत पदक हासिल किया है। डाक्टरों ने उसे आराम की सलाह दी थी, लेकिन उसने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी। शर्मीले स्वभाव वाले विजय ने बचपन में अपने दोस्तों के साथ कभी कंचे तक नहीं खेले और आज दुनिया के दिग्गज निशानेबाजों को धूल चटा रहे हैं।
नायब सूबेदार विजय कुमार के पिता बांकूराम ने बताया कि उनकी इच्छा थी कि उनका बेटा कमीशन पास कर अफसर बने, लेकिन विजय जमा एक से ही जिद्द पकड़े हुए था कि उसे सेना में भर्ती होना। वर्ष 2001 में सेना में भर्ती होने के बाद विजय के अफसरों ने विजय की ग्रिप देख उसे पिस्टल शूटिंग में तराशा। बांकू राम का कहना है कि उनके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वे गोलियां खरीदकर अपने बेटे को शूटिंग प्रैक्टिस करवाते।
यहां से पीछे मुड़कर नहीं देखा
वर्ष 2005 में जूनियर वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप में विजय कुमार ने पहली बार गोल्ड मेडल जीता। इसके बाद विजय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2006 में कॉमनवेल्थ खेलों में दो गोल्ड हासिल कर अपना लोहा मनवाया। विजय ने ओलंपिक में रजत पर निशाना साध कर सभी को चकित कर दिया।
मक्की के खेत में दी बधाई
विजय के रजत पदक जीतते ही पूर्व बीडीसी सदस्य अश्वनी कुमार उनके परिवार को बधाई देने घर पहुंचे। पूरा परिवार मक्की की फसल काट रहे थे। वे बधाई देने खेत में ही पहुंच गए। विजय के पिता बांकू राम, दादी ब्रह्मी देवी, माता रोशनी देवी, चाचा पुरुषोत्तम चंद सहित अन्य परिवार सदस्य मेडल मिलने से बहुत खुश हैं। पंचायत प्रधान बीना देवी, उपप्रधान रमेश चंद, पूर्व प्रधान रमेश शर्मा, पूर्व प्रधान बीरबल दास, हंसराज डा. राज शर्मा, जितेंद्र बंटी, संजीव शेखर, मनोहर लाल सहित अन्यों ने विजय के घर जाकर बधाई दी है।
सूबेदार विजय कुमार का प्रोफाइल
कुल मेडल---178
राष्ट्रीय स्पर्धा में
106 गोल्ड, 18 रजत, 12 कांस्य
अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में
17 गोल्ड, 13 रजत, 11 कांस्य
2005 में जूनियर वर्ल्ड शूटिंग में गोल्ड मेडल
2006 में राष्ट्रमंडल खेलों में दो गोल्ड मेडल
2007 में दोहा एशियाड में एक गोल्ड, एक कांस्य
2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल में तीन गोल्ड, एक सिल्वर
2012 में लंदन ओलंपिक खेलों में सिल्वर मेडल
2014 में इचियोन एशियाड में रजत पदक