अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सुनाया फैसला, 30 हजार जुर्माना भी लगाया
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दोषी युवक से बरामद किया था 7.70 ग्राम चिट्टा अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। चिट्टा तस्करी के मामले में दोषी को अदालत ने तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवीण गर्ग की अदालत ने सभी गवाहों और सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी को 3 साल की कठोर कारावास की सजा के साथ 30,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर 6 महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। यह मामला 10 फरवरी 2021 का है, जब ढली पुलिस स्टेशन क्षेत्र में रात 10:40 बजे ढली चौक के पास पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी दीपक कुमार निवासी रोहड़ू जिला शिमला को देखा। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पुलिस को देखकर अपनी पेंट की जेब से एक पैकेट निकालकर सड़क के किनारे नाले में फेंक दिया। पुलिस ने पैकेट बरामद किया और इसमें से 7.70 ग्राम चिट्टा पाया गया।
पुलिस ने 11 फरवरी को ढली थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। मामले की जांच के बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई। अदालत में अभियोजन पक्ष ने 16 गवाह पेश किए। दो स्वतंत्र गवाहों दलजीत और जमींदर ने बरामदगी का समर्थन नहीं किया लेकिन अदालत ने पुलिस अधिकारियों की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए कहा कि स्वतंत्र गवाहों का समर्थन न करने से केस पर खास प्रभाव नहीं पड़ता है। न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि बरामदगी का तथ्य, कस्टडी की शृंखला, फोरेंसिक रिपोर्ट जिसमें डायएसिटाइलफॉर्फिन (हेरोइन या चिट्टा) की पुष्टि हुई और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन साबित हो गया है। सजा सुनाते समय अदालत ने आरोपी की युवा आयु, पहली बार अपराधी होना और सुधार की संभावना को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम सजा से अधिक लेकिन उदार दृष्टिकोण अपनाया। हालांकि एनडीपीएस एक्ट की सख्ती और समाज पर नशीले पदार्थों के खतरे को देखते हुए दंडात्मक सजा जरूरी बताई। आरोपी को हिरासत में लिया गया है। ट्रायल के दौरान हिरासत की अवधि सजा से घटाई जाएगी। अदालत ने जब्त हेरोइन को अपील अवधि समाप्त होने के बाद नष्ट करने का आदेश दिया गया।