सुरक्षा, भर्ती और बुनियादी सुविधाओं पर उठाई आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने शनिवार को कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया। परिषद ने छात्र हितों से जुड़े लंबित मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए परिषद सदस्यों के समक्ष मांग-पत्र सौंपा और शीघ्र समाधान की मांग की। परिषद ने स्पेशल चांस के लेट कॉलेज कैपेसिटी नियम में संशोधन कर केवल फेल विषयों में ही परीक्षा देने की अनुमति देने की मांग रखी। साथ ही 27 फरवरी को परिसर में हुई हिंसक घटना के दोषियों को निष्कासित करने की मांग भी उठाई।
इकाई अध्यक्ष अक्षय ठाकुर ने कहा कि यदि मांगों की अनदेखी हुई तो परिषद लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन तेज करेगी। अभाविप ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। परिषद ने स्पेशल चांस के लेट कॉलेज कैपेसिटी नियम में संशोधन कर केवल फेल विषयों में ही परीक्षा देने की अनुमति देने की मांग रखी। साथ ही 27 फरवरी को परिसर में हुई हिंसक घटना के दोषियों को निष्कासित करने की मांग भी उठाई गई। गैर-शिक्षक कर्मचारियों की कमी को शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बाधक बताते हुए परिषद ने रिक्त पदों को तुरंत भरने की बात कही।
स्वास्थ्य केंद्र में दो स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति कर 24 घंटे सेवाएं शुरू करने, पर्याप्त दवाइयों और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। परिसर की सुरक्षा के लिए संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग भी की। छात्रावासों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए परिषद ने नए हॉस्टल निर्माण, पुराने भवनों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, बिजली और मेस व्यवस्था सुधारने की मांग रखी। परीक्षा प्रणाली में सुधार, समय पर परिणाम, पारदर्शी पुनर्मूल्यांकन और छात्रों पर आर्थिक बोझ कम करने की भी मांग की गई।
अभाविप ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक अव्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता जताई। गैर-शिक्षक कर्मचारियों की कमी को शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बाधक बताते हुए परिषद ने रिक्त पदों को तुरंत भरने की बात कही। स्वास्थ्य केंद्र में दो स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति कर 24 घंटे सेवाएं शुरू करने, पर्याप्त दवाइयों और स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। छात्रावासों की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाते हुए परिषद ने नए हॉस्टल निर्माण, पुराने भवनों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, बिजली और मेस व्यवस्था सुधारने की मांग की।