अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अभय दुबे ने कहा कि बेरोजगारी और महंगाई भाजपा के दो भाई हैं। देश में अच्छे दिन तो भाजपा नेताओं और उनके उद्योगपति मित्रों के आए हैं। नोटबंदी और जीएसटी से जनता को तो बुरे दिन ही दिखाए गए हैं। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में प्रेस वार्ता में अभय दुबे ने कहा कि हिमाचल में हुए तीन विधानसभा क्षेत्रों और एक लोकसभा सीट पर जनता ने भाजपा को हराकर करारा जवाब दिया है। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना का झूठ परोसा है। संसद में रखे गए आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष साढ़े तीन करोड़ महिलाओं ने गैस सिलिंडर रिफिल नहीं करवाए हैं।
प्रधानमंत्री का रेवडि़यां बांटने का बयान गलत है। उन्होंने बिजली संशोधन कानून का कांग्रेस लंबे समय से विरोध कर रही है। केंद्र सरकार ने इस कानून को अब स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजा है। इस कानून की आड़ में केंद्र सरकार राज्यों की सरकारों की ओर से बिजली उपभोक्ताओं को दी जाने वाली क्रॉस सब्सिडी खत्म करने जा रही है। राष्ट्रीय टैरिफ नीति बनाई जा रही है। निजी कंपनियों के लिए यह कानून बनाया जा रहा है। महंगाई और बेरोजगारी ने जनता को तंग कर दिया है। केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का जनता को अंजाम भुगतना पड़ रहा है। महंगाई और बेरोजगारी को हराने के लिए भाजपा को हराना जरूरी हो गया है। हिमाचल की जनता को इसकी शुरूआत करनी होगी।
कांग्रेस चुनाव जीते तो ईवीएम ठीक अगर हारे तो हो जाती हैं हैक : रणधीर
वहीं, भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने कहा है कि चुनाव शुरू होने से पहले कांग्रेस ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। यह कांग्रेस नेताओं के ईवीएम को दोष देने और उसी के लिए अटकलें लगाने के बयानों से काफी स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि क्या विडंबना है कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तो ईवीएम ठीक होती हैं लेकिन जब वे चुनाव हार जाती है तो वही ईवीएम हैक हो जाती हैं। वह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि भाजपा एक ऐसा राजनीतिक दल है जो नैतिक रूप से चुनाव लड़ता है। कांग्रेस दो मुंह वाली पार्टी है और उनकी बातों पर कभी भरोसा नहीं किया जा सकता। वे जो कहते हैं, वह कभी नहीं करते है। दूसरी तरफ भाजपा जो कहती है, उसे करके दिखाती है। इसके लिए उनके पास कई उदाहरण हैं और हिमाचल में उन्होंने अपने घोषणापत्र की प्रतिबद्धताओं से कहीं अधिक काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के पास राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नेतृत्व संकट है, देश के सभी हिस्सों से नेता कांग्रेस को छोड़ रहे हैं। कपिल सिब्बल, एम खान और गुलाम नबी आजाद इसके ताजा उदाहरण हैं। हिमाचल में उनके मौजूदा विधायक पवन काजल और लखविंदर राणा भाजपा में शामिल हो गए हैं।