राजधानी में शहरी गरीबों को आशियाना मिलने का सपना टूटता दिख रहा है। मार्च 2015 में आशियाना प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय अवधि समाप्त होनी है, लेकिन 460 फ्लैट बनाने का मामला फाइलों तक सीमित है।
कम बजट और अधिक लागत के चलते शहरी गरीबों के लिए महत्वाकांक्षी इस प्रोजेक्ट पर ब्रेक लग गई है। कुल 636 मकानों में से सिर्फ 174 का अभी निर्माण चल रहा है। इन 174 मकानों में से सिर्फ 40 मकान अभी बन कर तैयार हुए हैं।
साल 2007-08 में केंद्र सरकार ने आशियाना वन और टू प्रोजेक्ट स्वीकृत किया था। शहरी गरीबों के आशियाना प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने साल 2013 में जो अतिरिक्त समय दिया था, वह भी बेकार होता नजर आ रहा है।
460 मकान फाइलों में दफन
आलम यह है कि अतिरिक्त लागत पूरी नहीं हो रही है और गरीबों के 460 मकान कागजों में ही दफन हो गए हैं। अतिरिक्त लागत राशि का पूरा न हो पाना और ढिंगूधार को छोड़कर कहीं अन्य साइट प्रोजेक्ट के लिए न मिलना इसका एक कारण है।
इसी तरह आशियाना टू प्रोजेक्ट में जो मकान बन भी रहे हैं, वह भी एनएच की भेंट चढ़ गए हैं। बीते साल अगस्त माह में नगर निगम ने टेंडर निकालने की बात कही लेकिन अब टेंडर निकलना तो दूर प्रोजेक्ट की फाइलें भी नगर निगम शायद ही खोलेगा।
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि जो मकान एनएच की जद में आ रहे हैं, उन पर आपत्ति दर्ज की गई है। ढिंगूधार में जो मकान बनने हैं उसके विकल्प में साइट तलाशने के लिए भी प्रक्रिया जारी है। अतिरिक्त लागत राशि न होने के कारण प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने में समस्या पेश आ रही है। प्रोजेक्ट को सिर चढ़ाने की पूरी कोशिश की जा रही है।
गरीबों के इतने मकान हैं कागजों में
नगर निगम को आशियाना वन में 252 और आशियाना टू में 384 मकान बनाने हैं। आशियाना टू के कुल 384 मकानों में से 176 मकान निर्माणाधीन है। आशियाना टू में अब निगम को 208 मकान बनाने हैं। कुल मिलाकर प्रोजेक्ट में निगम को 460 मकान बनाने हैं।
दोनों प्रोजेक्ट की राह में सबसे बड़ा रोड़ा अतिरिक्त लागत राशि का है। केंद्र सरकार ने आशियाना वन प्रोजेक्ट के लिए 9.99 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं लेकिन टेंडर में ठेकेदार ने 17.14 करोड़ की बोली लगाई।
आशियाना टू प्रोजेक्ट में भी जहां केंद्र सरकार ने करीब 14 करोड़ की धनराशि स्वीकार की है, वहीं इस कार्य को करने के लिए ठेकेदार कम से कम 18 करोड़ से कम की राशि पर तैयार नहीं है।