आरुषि ने उपलब्धि का श्रेय माता-पिता को दिया संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शिमला ग्रामीण की होनहार डॉ. आरुषि मेहता ने मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहली नियुक्ति अपने ही पैतृक गांव धरोगड़ा में पाई है। इससे पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। आरुषि ने कहा कि वह चाहती हैं ग्रामीण क्षेत्रों में नौकरी आम लोगों की सेवा की जाए। डॉ. आरुषि के माता-पिता भी समाज सेवा के क्षेत्र में अग्रणी हैं। इनके पिता नरेंद्र मेहता राज्य उपभोक्ता आयोग में रजिस्ट्रार हैं। मां यशोदा मेहता आयुष फार्मेसी में ऑफिसर हैं। आरुषि ने दयानंद पब्लिक स्कूल शिमला से पढ़ाई की और एमबीबीएस टांडा मेडिकल कॉलेज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पब्लिक सर्विस कमिशन की परीक्षा पास की। अपनी उपलब्धि का श्रेय उन्होंने अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज को दिया है।
सेवा, निष्ठा और समाज के प्रति समर्पण के यही संस्कार आरुषि की सफलता में स्पष्ट दिखाई देते हैं। स्थानीय निवासी चेतन, विजय और गौरव का कहना है कि यह पहली बार है जब धरोगड़ा की किसी बेटी ने मेडिकल की शिक्षा पूरी कर सीधे अपने गांव सेवा को सेवा के लिए चुना। डॉ. आरुषि की यह पहल सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि बेटियों की क्षमता और समाज के प्रति उनके समर्पण का संदेश है। उन्होंने डॉ. आरुषि मेहता के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।