बर्फ से ढका मार्ग, हाड़ कंपाने वाली ठंड और बर्फबारी। 13050 फुट की ऊंचाई वाले रोहतांग दर्रे की दुश्वारियों से जूझती एक जिंदगी को बचाने की जद्दोजहद में लगे कुछ लोगों का समूह तमाम चुनौतियों में आगे बढ़ता रहा।
हवाई उड़ानें रद्द होने के चलते पूरी तरह से अलग थलग पड़े इलाके से यह लोग लकड़ी की चारपाई को कंधों पर उठाए हुए थे। उस पर बीमार महिला को लिटाया गया था। जान का जोखिम उठाकर चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन सरीखे अभियान को आखिरकार कुल्लू पहुंचकर पूरा किया गया।
हेलीकाप्टर में सीट न मिलने से पीठ पर डठाकर लाना पड़ा
साढ़े तीन घंटे तक रोहतांग दर्रे से गुजरने के बाद बीमार महिला को कुल्लू अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसका उपचार चल रहा है। बीमार महिला के परिजन पिछले कई दिन से हेलीकाप्टर का इंतजार कर रहे थे
लेकिन इस बीच हेलीकाप्टर की उड़ानें अचानक बंद होने से महिला को रोहतांग दर्रे से होकर कुल्लू पहुंचाने का निर्णय लिया गया। डॉक्टर ने महिला को पहले ही उपचार के लिए कुल्लू रेफर कर दिया था।
उदयपुर उपमंडल के पिमल (लोअर शकौली) गांव की 60 वर्षीय महिला प्रेमदासी की टांग में सूजन आने से उनकी हालत गंभीर बनी है। वे चलने में पूरी तरह असमर्थ हैं। बीमार महिला के बेटे शिवलाल ने बताया कि हेलीकाप्टर में सीट न मिलने से मजबूरन मां को इलाज के लिए पीठ पर उठाकर लाना पड़ा।
बर्फ में चले साढ़े तीन घंटे
महिला की मदद करने वाले राम सिंह ने बताया कि बर्फबारी के बीच रोहतांग में चंद किलोमीटर का फासला तय करने में उन्हें करीब साढ़े तीन घंटे लग गए। फिलहाल, महिला का उपचार क्षेत्रीय अस्पताल में चल रहा है। एसडीएम उदयपुर विशाल शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ दिन से घाटी के लिए हेलीकाप्टर सेवा बंद है।
बीमार जेई को भी उठाकर पहुंचाया कुल्लू
बिजली बोर्ड के थिरोट प्रोजेक्ट में तैनात कनिष्ठ अभियंता प्रेम को भी पीठ पर उठाकर रोहतांग दर्रा पार कराया गया। टांगों में लकवा मार जाने से वह चलने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा, परिजनों ने प्रेम को पीठ पर उठाकर रोहतांग दर्रा पार कर कुल्लू अस्पताल पहुंचाया है।