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Shimla News: फोरलेन का निर्माण कर रही कंपनी पर तीन लाख रुपये जुर्माना

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ढली–कैथलीघाट फोरलेन निर्माण के दौरान मलबा नाले में फेंकने से पर्यावरणीय क्षति पहुंचाने का है आरोप
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प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने की कार्यवाही

खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचपीएसपीसीबी) ने गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड कंपनी पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के रूप में तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। कंपनी वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग-5 के ढली–कैथलीघाट फोरलेन हिस्से का निर्माण कर रही है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शिमला स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार तीन जुलाई को निरीक्षण के दौरान पाया गया कि गावर कंस्ट्रक्शन द्वारा मेघाव से शकराल तक फोरलेन निर्माण कार्य का मलबा घाटी में अवैज्ञानिक तरीके से डंप किया जा रहा है। ब्रिज नंबर-एक के पास मलबा सीधे नाले के किनारे फेंका था जो पानी में घुलकर प्रदूषण का खतरा पैदा कर रहा था। यही नहीं डंपिंग साइट-3 पर बनाए गए क्रेट वॉल (सुरक्षा दीवार) दबाव के कारण झुक गई थी और वहां लगाए सुरक्षात्मक उपाय नाकाफी पाए गए। बोर्ड ने यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों तथा जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के तहत की है।
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क्षेत्रीय अधिकारी ने 8 जुलाई को कंपनी को नोटिस जारी किया था। नोटिस में निर्देश दिए थे कि कंपनी तुरंत डंपिंग रोकें, नाले के पास फेंका गया मलबा हटाएं, डंपिंग साइटों पर सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत करें और स्क्रीनिंग प्लांट लगाने के लिए बोर्ड से सहमति प्राप्त करें। लेकिन कंपनी ने इस पर अमल नहीं किया। स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने पॉल्यूटर पे प्रिंसिपल लागू करते हुए गावर कंस्ट्रक्शन को तीन स्थानों पर उल्लंघन का दोषी माना और प्रत्येक साइट पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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तीन दिन में जमा करनी होगी राशि
बोर्ड के सदस्य सचिव परवीन चंदर गुप्ता ने आदेश जारी किए कि गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को यह राशि तीन दिन के भीतर बोर्ड के खाते में जमा करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर जुर्माना जमा नहीं किया जाता है, तो कंपनी के खिलाफ जल एवं वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2013 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अभिषेक राय बनाम राज्य हिमाचल प्रदेश और अन्य मामले में आदेश पारित किए थे जिसमें निर्माण कार्यों के दौरान पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए थे। ढली–कैथलीघाट फोरलेन परियोजना पर लंबे समय से स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों की नजर में है। इस मार्ग के निर्माण के दौरान कई बार मलबा नालों और घाटियों में गिरने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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