निजी बसों में टक्कर, छह घायल, सीएम का काफिला फंसा
सर्कुलर रोड पर वाहनों की आवाजाही थमी, डायवर्ट करना पड़ा ट्रैफिक
ओल्ड बस स्टैंड से आने वाले वाहनों को हाईकोर्ट होते किया डायवर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। वीरवार शाम करीब छह बजे सर्कुलर रोड पर होटल होली डे होम के पास दो तेजरफ्तार निजी बसें आपस में टकरा गईं। हादसे में चालक समेत छह लोग घायल हो गए। गाड़ियों की दोनों ओर से लंबी लाइनें लग गईं। इस दौरान मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का वाहन काफिला भी कुछ देर के लिए जाम में फंस गया। सीएम टालेंड से बैम्लोई की ओर आ रहे थे। बसों को क्रेन से हटाने के लिए समय लग गया क्योंकि क्रेन का स्पॉट तक पहुंचाना भी मुश्किल था। पहले से संकरी सड़क और उस पर गाड़ियों की लाइन से क्रेन को जगह बनाने में काफी वक्त लगा। एसपी शिमला ओमापति जमवाल भी मौके पर पहुंचे।
बसों में टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बसों की ड्राइवर साइड एक-दूसरे के भीतर घुस गई। सड़क से बसों को हटाने के लिए क्रेन मंगवानी पड़ी। सड़क के बीचोंबीच बसें फंसने के कारण पूरा सर्कुलर रोड जाम हो गया। वाहनों की कतार ट्रिपल एच से ओल्ड बस स्टैंड और दूसरी ओर खलीणी तक लग गई। गाड़ियों को जाम से निकालने के लिए ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। सर्कुलर रोड जाम होने के बाद पुलिस ने ओल्ड बस स्टैंड की ओर से आ रहे ट्रैफिक को हाईकोर्ट होते हुए डायवर्ट किया। छोटा शिमला की ओर से आ रही गाड़ियों को खलीणी से टूटीकंडी बाईपास की ओर डायवर्ट कर दिया गया। ओल्ड बस स्टैंड और लोकल बस स्टैंड से छोटा शिमला, संजौली और ढली जाने वाली बसों को वाया लक्कड़ बाजार बस स्टैंड रवाना किया गया। खलीणी, विकासनगर, बीसीएस, न्यू शिमला, पंथाघाटी और मैहली रूट पर चलने वाली बसें वाया टूटीकंडी आईएसबीटी रवाना की गईं। दुर्घटना के बाद करीब एक घंटे तक सर्कुलर रोड पर वाहनों की आवाजाही थमी रही।
पुलिस और आरटीओ की अनदेखी पड़ रही भारी
शिमला पुलिस और आरटीओ की अनदेखी के कारण निजी ऑपरेटरों की दबंगई आम पब्लिक पर भारी पड़ रही है। शहर की बेहद संकरी सड़कों पर निजी बसें तेजरफ्तार से दौड़ रही हैं। शहर के हर दूसरे मोड़ पर पुलिस के जवान तैनात हैं बावजूद इसके मनमानी करने वाले बस ऑपरेटरों पर पुलिस महकमा अंकुश नहीं लगा पा रहा है। परिवहन विभाग के तहत आरटीओ दफ्तर भी बसों के निरीक्षण के नाम पर महज खानापूर्ति कर रहा है।
न वर्दी, न टिकट, हर बस में कानफाड़ू म्यूजिक
पुलिस और आरटीओ विभाग के दावों के बावजूद शहर में चल रही निजी बसों में ड्राइवर कंडक्टर वर्दी तक नहीं पहनते। आलम यह है कि एक भी बस में सवारियों को टिकट नहीं दिया जा रहा। बसों में कानफाड़ूू म्यूजिक बजता है। अगर कोई यात्री आपत्ति जताए तो उससे दुर्व्यवहार किया जाता है।
हादसे के बाद होती है महज रस्म अदायगी
बस हादसे के बाद रस्म अदायगी के लिए पुलिस और आरटीओ दो चार दिन बसों का निरीक्षण कर कार्रवाई करते हैं। इस दौरान ऑपरेटर भी अपनी बसों में चालकों-परिचालकों को वर्दी पहना देते हैं और टिकटें देनी शुरू कर दी जाती हैं लेकिन सरकारी महकमों के ढीले पड़ते ही पब्लिक को प्राइवेट ऑपरेटरों के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाता है।
एएसपी सिटी प्रवीर ठाकुर ने कहा कि दो प्राइवेट बसों में टक्कर होने की वजह से ट्रैफिक जाम हो गया। हादसे में चालक समेत छह लोगों को चोटें आई हैं। थाना सदर पुलिस दुर्घटना के कारणों की जांच कर रही है।