अंग्रेजी शासनकाल में देश की राजधानी रहे विश्व प्रसिद्ध शिमला शहर का नाम बदलकर श्यामला करने के विचार से ज्यादातर लोग सहमत नहीं हैं। ‘अमर उजाला’ की ओर से कराए गए ऑनलाइन पोल में 91 फीसदी लोगों ने शिमला शहर का नाम बदलने के विचार पर असहमति व्यक्त की है। कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी। कुछ लोगों ने यह भी टिप्पणी की है कि नाम बदलने के बजाय सरकार को विकास पर ध्यान देना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के एक मंत्री ने शिमला का नाम बदलनेे की चर्चा छेड़ी तो इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आईं। विपक्ष ने ही नहीं, बल्कि कई बुद्धिजीवियों ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरा। आखिर सरकार इस मामले में बैकफुट पर आ गई।
इसी बीच अपने पाठकों से ‘अमर उजाला’ ने भी अमर उजाला डॉट कॉम के शिमला फेसबुक पेज पर ‘क्या शिमला का नाम बदलकर श्यामला करना चाहिए?’ सवाल पूछा। पोल को छह दिन के लिए चलाया गया। जवाब हां या नहीं में पूछा गया था। कुल 1500 लोगों ने पोल में हिस्सा लिया, जिनमें से 1300 (91 फीसदी) ने नहीं जबकि 127 (9 फीसदी) लोगों ने हां में जवाब दिया। दिलचस्प है कि इस पोल को ऑनलाइन देखने वाले की संख्या 26 हजार रही।
यहां जानिए पूरा मामला
देश में शहरों के नाम बदलने की कवायद के बीच ऐतिहासिक शहर शिमला का नाम बदलने की चर्चाएं जोरों पर हैं। शिमला का नाम बदलकर श्यामला करने को लेकर भी बाकायदा अभियान चला। विश्व हिंदू परिषद शिमला का नाम बदलने के लिए लंबे समय से सरकार से मांग कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार भी शिमला का नाम बदलने के पक्ष में नजर आए। सीएम जयराम ने इस मामले पर विचार करने की बात कही थी।
फेसबुक पर पाठकों ने ये दी प्रतिक्रियाएं
प्रवीण ने कमेंट किया कि सरकार जनता की जरूरतों की तरफ ध्यान दे, नाम बदलने में क्या रखा है। मुनीष कुमार ने कहा कि शिमला नाम सबसे बेहतर है। समीक्षा शर्मा ने कहा- ओल्ड इज गोल्ड। विजय सिंह और रजनी शर्मा ने कहा- शिमला का नाम नहीं बदला जाए।
रविकुमार दलित ने कहा कि जब हम अपने बुजुर्गों का नाम नहीं बदल सकते तो शिमला का क्यों। गोपाल रावत बोले-शहर के नाम बदलने में पैसा खर्च करने के बजाय सरकार को ये पैसा अन्य विकास कार्यों पर खर्च करना चाहिए। हवा सिंह ठाकुर ने कहा कि शिमला का नाम बदलने के पीछे एक तर्क यह दिया जा रहा है कि इस नाम से गुलामी की बू आती है।
यदि ऐसा है तो शिमला के पास आज के समय स्वदेशी क्या है। सरकार जिस सचिवालय में बैठी है, उसमें एक-एक पत्थर ब्रिटिश प्रशासन का है। रिज और माल रोड ब्रिटिश प्रशासन ने बनाया है तो उसे तोड़ दें क्या। मुख्य पेयजल स्कीम ब्रिटिश समय की है। शिमला की ऐतिहासिकता समाप्त मत कीजिए।
नाम बदलने के समर्थन में ये लोग
डॉ. सुरेश कुमार कौशिक बोले जो लोग शिमला का नाम बदलने का विरोध करते हैं मैं उनसे एक बात पूछना चाहता हूं कि क्या अगर उनके बुजुर्गों के नाम किसी ने बदल दिए हों तो क्या उनको असली नाम से पुकारना गलत है। जितेंद्र शर्मा ने कहा कि वैसे भी शिमला नाम के साथ-साथ प्रकृति के कारण प्रसिद्ध है। रेबल राजपूत ने कहा- नाम बदलों पर श्यामला नहीं।