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भारी बारिश ने रोका रेस्क्यू ऑपरेशन, नहीं निकाले जा सके दिल्ली के सैलानी

Sat, 04 Jun 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुल्थान/पालमपुर
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दुर्गम घाटी बड़ा भंगाल में फंसे ट्रैकरों को जिला प्रशासन चौथे दिन भी रेस्क्यू नहीं कर पाया। - फोटो : फाइल फोटो
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हिमाचल के कांगड़ा जिले की दुर्गम घाटी बड़ा भंगाल में फंसे ट्रैकरों को जिला प्रशासन चौथे दिन भी रेस्क्यू नहीं कर पाया। इनकम टैक्स ट्रैकिंग एंड माउंटनेरिंग क्लब दिल्ली के नौ सदस्य तीन दिन से फंसे हुए हैं।
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शुक्रवार को पालमपुर से हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी, लेकिन भारी बारिश और धुंध की वजह से चौपर रेस्क्यू स्थल पर लैंड नहीं कर पाया। चौपर को वापस लाना पड़ा। 9 में से 3 ट्रैकर घायल अवस्था में हैं। वीरवार को भी हेलीकॉप्टर भेजा था।

लेकिन मौसम खराब होने पर चौपर को पालमपुर में उतारना पड़ा। प्रशासन शनिवार को फिर से चौपर भेजेगा। बड़ा भंगाल में सुनील कुमार गौड़ (45), संजीव मन (37), गौरव सिंह (34), गौरव वशिष्ठ (28), राजीव केआर  (37), अनुराग केआर सिंह (28), आवेश पाल (27), राजेश केआर (44), विपन (43) फंसे हैं।
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डीसी कांगड़ा रितेश चौहान ने बताया कि शुक्रवार को भारी बारिश और खराब मौसम की वजह से चौपर बड़ा भंगाल में लैंड नहीं कर पाया। प्रशासन ने ट्रैकरों से शुक्रवार दोपहर 12 बजे संपर्क किया था। ट्रैकरों ने बताया कि वे ठीक हैं। रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने पैदल रास्ते से टीम भी भेजी है।

टीम बड़ा ग्रां से करीब 7-8 किलोमीटर आगे पनारटू गांव तक पहुंच गई है। बारिश की वजह से मुश्किलें आ रही हैं। चंबा जिले के होली और मनाली से भी रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी की जा रही है। ट्रैकरों को सरकारी विश्रामगृह बड़ा भंगाल में ठहराया है।
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दुर्गम पहाड़ी इलाका है बड़ा भंगाल, स्‍थानीय लोगों ने दिया खाना

बड़ा भंगाल कांगड़ा की दुर्गम घाटी है। भारी बर्फबारी की वजह से यह 6 महीने शेष विश्व से कटा रहता है। - फोटो : Demo pic
ट्रैकिंग पर गए पर्यटकों के दल के खाने-पीने की व्यवस्था बड़ा भंगाल के लोगों ने कर दी है। नौ सदस्यीय दल मनाली से पैदल 31 मई को बड़ा भंगाल पहुंचा था। सभी लोग सुरक्षित हैं। बड़ा भंगाल जाते वक्त रास्ते में तीन पर्यटक 28 मई को घायल हुए थे। हालांकि, चोट ज्यादा नहीं थीं।

16 हजार फीट ऊंचा दर्रा पार कर पहुंचते हैं बड़ा भंगाल
बड़ा भंगाल कांगड़ा की दुर्गम घाटी है। भारी बर्फबारी की वजह से यह 6 महीने शेष विश्व से कटा रहता है। इसकी आबादी करीब 500 है। यहां पहुंचने के लिए समुद्र तल से करीब 16000 फुट ऊंचाई पर स्थित थंबसार दर्रे को पार करना पड़ता है। यहां खाने-पीने की सामग्री हेलीकॉप्टर से सरकार पहुंचाती है।
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