अपने घर तक पहुंचने के लिए कारगिल के जंसखर निवासी नौ लोग चार दिन बर्फ में पैदल चलेंगे। दल में शामिल एक 11 माह का बच्चा, दो महिलाओं समेत 9 लोगों ने वीरवार को 13050 फुट ऊंचे रोहतांग दर्रा को पैदल पार किया।
11 माह के बच्चे के साथ रोहतांग पार करना बेहद जोखिम भरा है, लेकिन दल ने जज्बे के साथ रोहतांग लांघा और सकुशल कोकसर पहुंचे। बचाव चौकी कोकसर से मिली जानकारी के अनुसार वीरवार को जंसखर के नौ लोगों ने रोहतांग दर्रा पार किया।
ये लोग 16703 फुट ऊंचे शिकुला दर्रा पैदल लांघकर 4 दिन बाद करग्या पहुंचेंगे। कोकसर पहुंचने पर कीह निवासी 60 वर्षीय आमची छोपेल ने बताया कि पीठ पर पांच दिन का राशन उठाकर रोहतांग और शिंकुला दर्रा पैदल पार कर अपने घर पहुंचेंगे।
बुलंद हौसले से 11 माह के बच्चे के साथ लांघा रोहतांग
उनके साथ कीह के ही छेवांग, सोनम नोरबू, मिन्डोन, छोंजोम और उनका 11 महीने का बच्चा तथा चाहपा निवासी छेरिंग मुरुप, करग्या निवासी दोरजे और ठिल्ले हैं। सर्दियों में अपने अपने परिवार के साथ कामकाज निपटाकर रिवालसर, धर्मशाला, कांगड़ा, बीड़, बोधगया, नेपाल के विभिन्न तीर्थों की परिक्रमा कर रविवार को अपने घर पहुंचेंगे।
11 माह के बच्चे की मां छोंजोम ने बताया कि अब घर में खेतीबाड़ी का दौर शुरू हो रहा है। लिहाजा, पैदल ही दो दर्रे पार कर घर पहुंचना होगा। इस दौरान वीरवार रात छीका-रारिक तथा दूसरी संध्या शिंकुला पीछे छुमी नगपो गुफा में काटेंगे।
तीसरी और अंतिम संध्या लाखंग में बिताकर चार दिन के लंबे सफर के बाद अपने गंतव्य पर पहुंचेंगे। इधर, बचाव चौकी के प्रभारी लुदर चंद ने बताया कि वीरवार को 11 महीने के बच्चे के साथ 2 महिलाओं समेत 9 जंसखर निवासियों ने रोहतांग दर्रा पैदल पार किया है।