शहरवासियों को अब नए भवन में रेन हार्वेस्टिंग के अलावा एक छोटा कंपोस्टिंग यूनिट भी बनाना होगा। नगर निगम इसके लिए भवन निर्माण के नियमों में संशोधन करने की तैयारी कर रहा है। इसकी योजना भी तैयार कर ली है। सदन में मंजूरी मिलने के बाद रिहायशी भवनों में पायलट आधार पर इसे लागू करने की योजना है। रोज 100 किलो से ज्यादा गीला कचरा निकालने वाले ढाबों और होटलों आदि के लिए इसे अनिवार्य किया जा रहा है।
नगर निगम के अनुसार चंडीगढ़ समेत देश के कई शहरों में घर के भीतर ही गीले कचरे से कंपोस्ट बनाने की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। इसके लिए घर के परिसर में गीले कचरे की कंपोस्टिंग के लिए कूड़ेदान बनाना होगा ताकि रोज का गीला कचरा डाला जा सके। लोग खुद कंपोस्ट तैयार करके न सिर्फ इसे सब्जियों-फूलों की क्यारियों में डाल सकते हैं, बल्कि बेच भी सकेंगे। शहर में जिन नए भवनों के परिसर में जगह उपलब्ध होगी उन्हें कूड़ेदान भी बनाना होगा।
हालांकि, जिनके पास सिर्फ मकान बनाने लायक जमीन है, उन्हें निगम इससे राहत दे सकता है। आचार संहिता के बाद इस प्रस्ताव को सदन में चर्चा के लिए लाया जाएगा। यह प्रस्ताव सदन की मंजूरी के अलावा जगह की उपलब्धता और शिमला के तापमान पर भी निर्भर करेगा।
नहीं पास हो रहे नक्शे, 25 मई के बाद करें आवेदन
शहर में नए नक्शों के आवेदन भी नहीं लिए जा रहे। निगम प्रशासन के अनुसार आचार संहिता के कारण अभी नए नक्शे पास नहीं हो रहे। ऐसे में लोग 25 मई के बाद ही आवेदन करें। इसके अलावा जिन लोगों ने आचार संहिता से पहले आवेदन कर रखा है, उनके नक्शों पर भी आचार संहिता के बाद ही फैसला लिया जा सकेगा।