प्रदेश सरकार के बस किराया बढ़ोतरी के फैसले का सबसे अधिक बोझ राजधानी शिमला के लोगों की जेब पर पड़ेगा। शिमला में लगभग हर 300 मीटर पर बस स्टॉप हैं, न्यूनतम किराया 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये करने के बाद अब लोगों को आधा किलोमीटर बस सफर के भी छह रुपये चुकाने होंगे।
न्यूनतम किराये में दुगनी बढ़ोतरी को शहर की जनता किसी भी सूरत में तर्कसंगत नहीं मानती। आम जनता का कहना है कि न्यूनतम किराया दोगुना होने से ओल्ड बस स्टैंड से हाईकोर्ट, छोटा शिमला से निगम बिहार, लक्कड़ बाजार से आईजीएमसी, संजौली से ढली जाने के भी छह-छह रुपये चुकाने होंगे। शहर के लोग असमंजस में है कि आखिर क्या सोच कर जयराम सरकार ने यह फैसला लिया है।
लोगों की मांग है कि बस किराया बढ़ोतरी के फैसले को सरकार तुरंत प्रभाव से वापस ले और साथ ही स्थानीय विधायक एवं मौजूदा शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि वह शहर की जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाएं। न्यूनतम किराया 3 रुपये ही रखा जाए। उधर जब ‘अमर उजाला’ ने स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज के सामने जनता की बात को रखी तो उन्होंने कहा कि ‘देखेंगे, इस मुद्दे पर मंत्री जी से बात करेंगे। अभी परिवहन मंत्री यहां नहीं हैं जब आएंगे तो उनसे बात की जाएगी। शहर की क्या व्यवस्था है यह भी देखा जाएगा।’ हालांकि सोमवार को जिस कैबिनेट बैठक में किराया बढ़ोतरी का फैसला लिया गया उसमें शिमला के विधायक एवं शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज खुद मौजूद थे।
यह जनता से धोखा, वापस करनी होगी बढ़ोतरी : सिंघा
सरकार ने जनता से धोखा किया है। विधानसभा के अंदर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि कैबिनेट बैठक में किराये की दरें घटाने का फैसला लेंगे और अब प्राइवेट तथा एचआरटीसी सभी बसों का किराया बढ़ा दिया। सरकार के इस फैसले का विरोध किया जाएगा। लोगों को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे। परिवहन सुविधा जन सेवा के तहत आती है और जन सेवाओं पर कर नहीं लगाया जा सकता। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बस किराया बढ़ाने के फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करना चाहिए।
- राकेश सिंघा माकपा नेता, विधायक ठियोग
विधानसभा से लेकर सड़कों तक होगा विरोध : नरेश
जयराम सरकार ने लोगों को महंगाई का पहला तोहफा दिया है। बस किराये में बढ़ोतरी का विरोध कांग्रेस विस से लेकर सड़कों तक करेगी। लोस चुनाव में लोग भाजपा सरकार को वोट के रूप में जवाब देंगे। आने वाले दिनों में ट्रकों का भाड़ा बढ़ने के बाद लोगों पर और अधिक महंगाई का बोझ पड़ेगा। केंद्र सरकार डीजल पैट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाकर और हिमाचल सरकार वैट की दरें घटा कर लोगों को राहत दे सकती थी लेकिन जिम्मेवारी निभाने के स्थान पर जनता पर बोझ डाल दिया। - नरेश चौहान प्रवक्ता प्रदेश कांग्रेस
निजी बसें 120
32 सीटर हैं
हर बस आठ से दस चक्कर लगाती है
एचआरटीसी : 200
इसमें 70 स्कूलों के लिए चलती हैं