अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे डीआईएस के छात्रों ने सोमवार को राज्यपाल से भेंट की। राज्यपाल ने सभी मांगों को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद छात्रों ने आमरण अनशन तोड़ दिया है। राजभवन में बुलाए गए डीआईएस के छात्र संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत से मुलाकात की और अपनी समस्याएं रखीं। करीब पौने घंटे तक वार्ता चली। इस दौरान पंकज, विवेक राज नेगी, अर्पणा, छेरिंग शामिल रहे। कहा कि सेल्फ फाइनांसिंग कोर्स होने के बावजूद आज तक क्लास रूम, स्थायी फैकल्टी, कंप्यूटर लैब तक की सुविधा नहीं मिल पाई है। विवि प्रशासन ने आईआईएचएस में चल रहे इन कोर्स के लिए अलग फैकल्टी और इंटर डिस्पिलेनरी स्टडीज (डीआईएस) तो बनाया लेकिन अधिसूचना जारी नहीं की। छात्रों ने विभाग में हर तरह की सुविधाएं प्रदान, पीएचडी की सुविधा शुरू करने, स्थायी फै कल्टी देने जैसी तमाम मांगें उठाईं। पंकज ने बताया कि राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने उन्हें पूरा भरोसा दिया कि उनकी मांगों को जल्द पूरा किया जाएगा। पंकज, अर्पणा, विवेक राज नेगी और छेरिंग ने राज्यपाल का आभार जताया है।
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दिनेश, विक्रम को जूस पिलाकर समाप्त किया अनशन
विवि के चांसलर से सकारात्मक जवाब मिलने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने विवि परिसर में पहुंच कर आमरण अनशन पर बैठे दोनों छात्रों दिनेश और विक्रम को जूस पिलाकर अनशन समाप्त किया। पंकज ने कहा कि कुलपति बार-बार आश्वासन देते रहे, मगर डीआईएस के छात्रों को भरोसा नहीं था। राज्यपाल ने उनके लिए समय दिया और उनकी पूरी सुनी।
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16 अगस्त से शुरू किया था अनशन
डीआईएस के छात्रों के बने संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विवि प्रशासन को दिए गए समय के बाद 16 अगस्त से क्रमिक अनशन शुरू किया। 22 अगस्त तक यह चला। 23 अगस्त से आमरण अनशन शुरू किया गया। पुलिस की मदद से 25 अगस्त को दोनों छात्रों को जबरन उठाया गया। विरोध के बाद दो और छात्र दिनेश और विक्रम आमरण अनशन पर बैठे। शनिवार 26 अगस्त को विवि के तमाम छात्रों के समर्थन में आने से पूर्ण शिक्षा बंद रखा।