विशेषज्ञों की रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद बाहरी राज्यों के विवि की अच्छी नई तकनीकों को अपने विवि में लागू किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि शीघ्र ही विवि का अपना विजन डॉक्यूमेंट और तीन से पांच साल तक चलने वाला मास्टर प्लान भी तैयार किया जाएगा।
प्रदेश तकनीकी विवि के अधीन चल रहे सभी 43 महाविद्यालयों की प्राचार्यों की एक बैठक बुलाई जाएगी। संख्यात्मक के बजाय गुणात्मक शिक्षा पर जोर दिया जाएगा।
इसके साथ ही विवि को यूजीसी से मान्यता दिलाने के लिए विवि में खाली चल रहे 35 पदों को भरने, पांच विभागों को शुरू करने के अलावा आधारभूत कमियों को दूर किया जाएगा।
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के तहत विवि के पाठ्यक्रमों में एकरूपता लाई जाएगी। तकनीकी विश्वविद्यालय को ग्लोबल यूनिवर्सिटी के रूप में विकसित करने के लिए भी प्लान तैयार किया जाएगा ताकि राज्य के ही नहीं अपितु विश्व भर से छात्र इस विवि के माध्यम से तकनीकी शिक्षा हासिल कर सकें।
तकनीकी विवि को सरकारी विवि बनाने के साथ निर्माणाधीन भवन का कार्य पूरा करवाने के प्रयास भी किए जाएंगे। साथ ही तकनीकी विश्वविद्यालय कुछ गांवों को भी गोद लेगा और इन गांवों के विकास के लिए तकनीकी तौर मदद मुहैया करवाई जाएगी।
इस मौके पर कुलसचिव एवं डीन अकादमिक डॉ. एनएन शर्मा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. वीपी पटियाल, विवि के वित्त अधिकारी अशोक धीमान और सह कुलसचिव संजीवन मनकोटिया भी मौजूद रहे।