जयराम सरकार की महत्वाकांक्षी जनमंच योजना के सफल होने में अफसर ही रोड़ा बन गए हैं। मुख्यमंत्री की ओर से हाल ही में बैठक कर जनमंच की शिकायतों के निस्तारण में हो रही देरी पर सख्त नाराजगी जताने के बावजूद हालात जस के तस हैं।
शुक्रवार को विधानसभा में नाचन से भाजपा विधायक विनोद कुमार की ओर से पूछे गए सवाल के लिखित जवाब ने एक बार फिर सिस्टम की असलियत सामने रख दी है। हाल यह है कि सात महीने के दौरान प्रदेश में तीन जनमंच कार्यक्रम हुए हैं।
इनमें कुल 5834 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 5065 शिकायतों का समाधान भी हो चुका है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री की ओर से शिकायतों के निस्तारण पर जोर देने के बावजूद अभी 769 लंबित पड़ी हुई हैं।
इनमें सबसे ज्यादा शिकायतों शिमला और किन्नौर की लंबित हैं। शिमला में कुल मिली 352 में से 135 शिकायतें लंबित हैं, किन्नौर में 511 में से 165 शिकायतों का समाधान नहीं हो सका है। मुख्यमंत्री के गृह जिले मंडी में 978 शिकायतों में से एक भी लंबित नहीं है, जबकि कुल्लू में सिर्फ तीन शिकायतें ही लंबित हैं।