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किराये पर घमासान, मंत्री की अगुवाई में सीएम से मिले पार्षद और कारोबारी

Wed, 02 Jan 2019 11:51 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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शहर में दुकानों का किराया बढ़ाने के नगर निगम के फैसले पर घमासान तेज हो गया है। सोमवार देर शाम मंत्री की अगुवाई में शहर के कई कारोबारी और पार्षद सचिवालय में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिले। इन्होंने किराया बढ़ोतरी के निगम के फैसले को गलत ठहराया और इसे रिव्यू करने की मांग की। साथ ही यह सभी आयुक्त पंकज राय को हटाने पर भी अड़ गए। इनका कहना था कि सदन में आयुक्त के कहने पर ही कुछ पार्षदों ने किराये को कई गुना बढ़ा दिया। यह देखा तक नहीं कि इस फैसले से कारोबारियों पर कितना असर पड़ेगा।

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पार्षद संजीव ठाकुर ने कहा कि गंज में कारोबार काफी घट गया है, ऐसे में कई गुना बढ़ा हुआ किराया कारोबारी कैसे देंगे। दूसरे कारोबारियों ने कहा कि किराया बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिले, इसके लिए कुछ पार्षदों को आयुक्त कार्यालय बुलाकर समझाया गया। सदन में इन्होंने वैसा ही कहा जैसा कहने को बोला था। कारोबारियों ने आरोप लगाए कि आयुक्त मंत्री और सीएम के आदेशों को भी नहीं मान रहे। उधर, सीएम ने कहा कि अभी मामला कोर्ट में विचाराधीन है। देखेंगे कि इस पर क्या हो सकता है।

किराये पर बंटी भाजपा, निगम ने कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट
किराये के मुद्दे पर भाजपा दो गुटों में बंट गई है। इनमें एक गुट स्थानीय नेता के साथ है जो किराया बढ़ोतरी के लिए भाजपा के कुछ पार्षदों को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। दूसरा गुट कह रहा है कि यदि नेता पार्षदों को रेट कम करने के स्पष्ट निर्देश देते तो किराया इतना न बढ़ता। सरकार अब रिव्यू करने का फैसला लेती है तो इसे फिर सदन में लाया जाएगा। लेकिन यह इतना आसान नहीं। उधर, नगर निगम ने मंगलवार को किराये को लेकर अपनी रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश कर दी है। तीन जनवरी को इस मामले पर सुनवाई होगी। रिव्यू का कोई विकल्प बचता है या नहीं, इसका पता कोर्ट की सुनवाई के बाद चलेगा।
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किराये में इतनी बढ़ोतरी सही नहीं : श्रीधर
अनाज मंडी ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक श्रीधर ने कहा कि किराये में भारी बढ़ोतरी हुई है। कारोबारियों से पहले भी हर तीन साल बाद बढ़ा हुआ किराया लिया जा रहा था। निगम पहली बार किराया बढ़ाने के गलत दावे कर रहा है। कांग्रेस जिला कमेटी के पूर्व महामंत्री संजीव कुठियाला ने कहा कि रामबाजार में कई बीपीएल परिवार से जुड़े लोग एमसी की दुकानें चला रहे हैं। इनमें कई छोटे कारोबारी भी शामिल है। निगम का बढ़ा किराया अब इन गरीब परिवारों को भी देना पड़ेगा। निगम को इन्हें राहत देनी चाहिए थी।

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