नवरात्र पर्व की दुर्गाष्टमी पर बुधवार को शहर के मंदिरों में भक्तों की कतारें लगी रहीं। राजधानी के कालीबाड़ी माता मंदिर सहित मां तारादेवी, संजौली के ढिंगु माता मंदिरों में हजारों की संख्या में भक्तों ने हाजिरी भर कर मां की पूजा अर्चना की। वहीं, मंदिरों में श्रद्धालुओं ने कन्याओं की पूजा कर उन्हें भोजन करवाया। कालीबाड़ी माता मंदिर में करीब पांच हजार से अधिक भक्तों ने मंदिर में पहुंच कर माथा टेका और पूजा की। कालीबाड़ी में अष्टमी और नवमीं के 24-24 मिनट कुल 48 मिनट की संधी पूजा मुख्य आकर्षण का केंद्र रही, जो दोपहर 12:1 बजे से 12:48 बजे तक चली।
मान्यता है कि भगवान राम ने इन 48 मिनटों में मां दुर्गा की विशेष पूजा कर रावण का वध कर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद प्राप्त किया था। शिमला कालीबाड़ी के सचिव डॉ. कलोल प्रमाणिक ने बताया कि इन नवरात्र में छठे नवरात्र से लेकर दशहरा उत्सव तक नवरात्र को काली मां की पूजा की जाती है। इन दिनों हजारों की संख्या में पश्चिम बंगाल से जो भी भक्त शिमला आते हैं, वे कालीबाड़ी मंदिर में आकर जरूर पूजा अर्चना करते हैं। अब तक हजारों ऐसे भक्त मंदिर में पूजा कर चुके हैं। अष्टमी के दिन मंदिर के कपाट सुबह साढ़े पांच बजे खोल दिए गए थे। देर शाम सात से आठ बजे के बाद तक चली आरती में भारी संख्या में भक्त पूजा करने पहुंचे थे। दिन भर आए भक्तों को खिचड़ी का भोग खिलाया गया।
तारादेवी माता मंदिर में पहुंचे हजारों भक्त
शिमला। तारादेवी माता मंदिर में भी सुबह छह से लेकर देर शाम साढ़े सात बजे की आरती तक पूरा दिन भक्तों का मेला लगा रहा। सात से दस हजार की संख्या में भक्तों ने मंदिर में परिवार के साथ पूजा-अर्चना कर मां तारा देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया। वहीं, अष्टमी के उपलक्ष्य में मंदिर के आसपास लगे मेले में सजी दुकानों में श्रद्धालुओं ने खरीददारी भी की।
मंदिर के मुख्य पुजारी कमलेश शर्मा ने बताया कि पूरा दिन हजारों की संख्या में लोग मां के दर्शन के लिए पहुंचे थे। वहीं, लोगों ने इस उपलक्ष्य में आयोजित दंगल को देखने का भी भरपूर आनंद लिया। तारा देवी मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन नीरज गुप्ता ने बताया कि अष्टमी के मौके पर मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। वहीं, भक्तों की सुविधा के लिए हर तरह के सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।