अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी स्थित कालीबाड़ी हॉल में शिमला नागरिक सभा की ओर से नशाखोरी और समाज में बच्चों पर पड़ते दुष्प्रभाव को लेकर सेमीनार का आयोजन किया। इस मौके पर शहर की दस संस्थाओं ने हिस्सा लिया। सेमीनार में युवाओं के नशाखोरी की ओर बढ़ते प्रभावों के बारे में जानकारी दी गई।
उद्घाटन के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता और पहचान वीमेन वेलफेयर सोसायटी की अध्यक्ष बिंदु जोशी ने कहा कि खेल मैदान, लाइब्रेरी, पार्क, सांस्कृतिक केंद्र और युवा क्लब की व्यवस्था न होने के कारण युवा पीढ़ि नशे की ओर अग्रसर है। अगर राजधानी में ये सुविधाएं मिलती हैं तो अधिकांश युवा नशाखोरी से दूर होंगे। उन्होंने बताया कि दक्षिण एशिया में भारत का नशाखोरी में पहला स्थान है। हिमाचल में भी यह चिंता की बात है। शहर में भी अधिकांश युवा नशे की चपेट में हैं। सरकार को इस बारे में सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। दूसरी ओर शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने बताया कि देश में जेलों में 2.8 फीसदी कैदी नशे का व्यापार करने के कारण बंद हैं। वहीं, हिमाचल में यह आंकड़ा 7.7 फीसदी है, जो राष्ट्रीय स्तर पर पांच फीसदी अधिक है। उन्होंने बताया कि शोध में यह बात सामने आई है कि सेकेंडरी में पढ़ने वाले 40 फीसदी युवा छात्र नशे की गिरफ्त में हैं। इस बारे में शिमला नागरिक सभा और अन्य प्रतिनिधिमंडल सरकार से मुलाकात कर ठोस कदम उठाने के लिए सुझाव बारे में बातचीत करेगा। वहीं सेमिनार में नागरिक सभा सचिव कपिल शर्मा ने कहा कि नशाखोरी के मुद्दे पर सभा शिमला शहर में व्यापक अभियान चलाएगी। सम्मेलन में शिमला नागरिक अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, सचिव कपिल शर्मा, हिमालय परिवार से विरेंद्र मोहन वशिष्ठ, एजुकेशन सोसायटी हेल्दी हिमाचल ब्राह्मण सभा के पदाधिकारी, नई आशा संस्था से विभूति, बाल मंच से रुद्रांश ठाकुर, आयुषि पुंडीर, जोशिता शर्मा, सूर्यांश पुंडीर, मदद सेवा ट्रस्ट से एडवोकेट एचएस पंवर, अर्जुन गुप्ता व विक्रम पंवर, शकराह पंचायत प्रधान सुमन गर्ग, हेल्प एज इंडिया से शुभम गर्ग और एसएर्फआई से अनिल, रमन, पवन, शिमला नागरिक सभा से जगमोहन ठाकुर, किशोरी ढटवालिया, बलबीर, बाबू, फालमा, उत्तम, आशु, रिशु गर्ग ने भाग लिया।