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जिला में रहा है कांग्रेस का दबदबा

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शिमला। शिमला जिला में बीते तीन चुनावों में कांग्रेस का दबदबा रहा है। 2003, 2007 और 2012 के चुनावों में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें मिली हैं। 2003 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं, जबकि ठियोग विधानसभा क्षेत्र से राकेश वर्मा बतौर निर्दलीय विजयी रहे थे। 2007 के चुनावों में कांग्रेस ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेपी को दो और निर्दलीय प्रत्याशी को एक सीट पर जीत मिली। 2012 के चुनावों में कांग्रेस को 6 जबकि बीजेपी और निर्दलीय प्रत्याशी को एक एक सीट पर विजय मिली थी।
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राजधानी शिमला की सीट पर 2003 में कांग्रेस प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी ने जीत दर्ज की। 2007 और 2012 में कांग्रेस को यह सीट अपने हाथों से गंवानी पड़ी। दोनों बार भाजपा के सुरेश भारद्वाज ने जीत दर्ज की। ठियोग विधानसभा सीट पर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले राकेश वर्मा का दबदबा रहा है। 2003 और 2007 में राकेश ने ठियोग सीट से निर्दलीय जीत दर्ज की है, हालांकि 2012 में विद्या स्टोक्स ठियोग से विधायक चुनीं गईं। रोहडृू और रामपुर विधानसभा क्षेत्र में बीते तीनों चुनावों में कांग्रेस को बढ़त मिली। 2003 और 2007 में वीरभद्र सिंह और 2012 में कांग्रेस की टिकट पर मोहन लाल ब्राक्टा ने जीत दर्ज की। कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र पर भी कांग्रेस का दबदबा रहा है। 2003 में इस सीट से सोहन लाल निर्दलीय जीते थे जबकि 2007 के विधानसभा चुनावों में सोहन लाल ने कसुम्पटी से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की। 2012 में कांग्रेस के टिकट पर अनिरुद्ध सिंह ने कसुम्पटी सीट से जीत दर्ज की। जुब्बल-कोटखाई सीट से 2003 में रोहित ठाकुर, 2007 में नरेंद्र बरागटा और 2012 में दोबारा रोहित ठाकुर ने जीत दर्ज की। 2012 में रोहित ठाकुर ने नरेंद्र बरागटा को रिकार्ड 9095 वोटों के अंतर से हराया।
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