हिमाचल में राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार डिजिटल राशन कार्डों का वितरण इसी हफ्ते से शुरू कर सकती है। विभाग को केंद्र से करीब सात लाख डिजिटल राशन कार्ड मिल चुके हैं
जिसके बाद विभाग राशन वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की कवायद में जुट गया है। प्रदेश में वर्तमान में करीब साढ़े सोलह लाख उपभोक्ता हैं। लंबे समय से राशन वितरण प्रणाली को लेकर सवाल उठते रहे हैं, जिसके चलते केंद्र और राज्य सरकार डिजिटल राशन कार्ड की मदद से राशन वितरण की प्लानिंग कर रही थी।
अब डिजिटल कार्ड की मदद से राशन वितरण में उपभोक्ताओं को जहां उनके हक का पूरा राशन मिलने में आसानी होगी। वहीं, राशन सप्लाई में होने वाली अनियमितता में भी कमी आएगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो डिजिटलाइजेशन के चलते करीब तीन लाख फर्जी कार्ड धारक वितरण प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री जीएस बाली ने बताया कि डिजिटल राशन कार्ड आने के साथ ही उनके वितरण की प्रक्रिया भी शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश जारी दिए हैं।
डिजिटल कार्ड से ये होंगे फायदे
अभी तक राशन कार्ड का सत्यापन न होने की वजह से वितरण में अनियमितता की काफी शिकायतें सामने आती थीं। दरअसल, ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें राशन कार्ड धारक को राशन मिले बगैर ही उसके हिस्से का कोटा बंट गया।
इसके अलावा अपात्रों के भी बीपीएल कार्ड बने हुए थे। वहीं, सस्ते राशन की दुकानों के संचालकों पर गड़बड़ी के आरोप लगते रहते थे। इसी गड़बड़ी पर अंकुश लगाने में डिजिटल कार्ड से मदद मिलेगी। इसके अलावा कार्ड धारक किसी भी दुकान पर जाकर यह भी जान सकेगा कि उसके कोटे का कितना राशन वह ले चुका है और कितना वह ले सकता है। वहीं, विभाग को भी वितरण की निगरानी करने में आसानी होगी।
पहले चरण में चार जिलों में लगेंगी पॉस मशीन
राशन वितरण को डिजीटल करने के साथ ही विभाग सस्ते राशन की दुकानों में लेनदेन को भी डिजीटल करने की तैयारी में जुटा है। इसके तहत पहले चरण में सिरमौर, कांगड़ा, किन्नौर और शिमला में प्वाइंट आफ सेल मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी जिससे लोग अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड के जरिए राशन की कीमत चुका सकेगे।