शिमला। शहरवासियों को 24 घंटे पानी देने के सतलुज वाटर प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। करीब 750 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को चलाने के लिए अलग कंपनी बनाई जा रही है।
इसके लिए शिमला ग्रेटर वाटर सर्कल का नाम बदलकर शिमला जल प्रबंधन निगम रखा जाएगा। यह निगम एक कंपनी के तौर पर काम करेगा। नाम बदलने और इसे कंपनी के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। हाल ही में शहरी विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ हुई नगर निगम अधिकारियों की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं। वर्ल्ड बैंक के इस प्रोजेक्ट की शर्तें पूरी करने के लिए फैसला लिया गया कि जल्द ही कंपनी के लिए नया भवन तलाशा जाएगा जिसमें यह प्रोजेक्ट संचालित होगा। 28 मार्च तक कंपनी के लिए भवन तलाशने, बीओडी बनाने और कंपनी का ढांचा तय करने संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। अप्रैल के पहले हफ्ते में वर्ल्ड बैंक की टीम फिर शिमला का दौरा करेगी। ऐसे में इस दौरे से पहले ही नगर निगम और सरकार सारी शर्तें पूरी करने की तैयारी कर रहे हैं।
शहर को मिलेगा 60 एमएलडी पानी
इस परियोजना से शिमला शहर को 55 से 60 एमएलडी तक पानी मिलेगा। पांच साल में यह प्रोजेक्ट पूरा किया जाना है। शहर को कुल 45 एमएलडी पानी की जरूरत है। वर्तमान में शहर को 42 एमएलडी तक पानी मिल रहा है। ऐसे में 60 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलने से लोगों को 24 घंटे पानी दिया जाएगा। साथ ही शिमला के बाहरी इलाकों में भी निगम पानी की सप्लाई शुरू करेगा।