आईजीएमसी में मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
ड्रिलिंग से उड़ती धूल के कारण परेशान रहे मरीज
इमरजेंसी वार्ड में चल रहा था निकास पंखे लगाने का काम
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आईजीएमसी के इमरजेंसी वार्ड में उड़ती धूल से स्ट्रेचरों पर लेटे मरीज काफी परेशान हो रहे हैं।
आईजीएमसी के इमरजेंसी वार्ड में इन दिनों निकास पंखे (डक्स) लगाने का कार्य किया जा रहा है। शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिक्ल विंग यह काम कर रहा था। छतों के साथ लगने वाले इन पंखों के लिए होने वाली वायरिंग के लिए ड्रिल की जा रही थी। इससे यहां पर काफी धूल उड़ रही थी। ऐसे में स्ट्रेचर पर लेटे मरीज काफी परेशान हो रहे थे। इनमें से कुछ ऐसे भी मरीज थे, जिन्हें कि ऑक्सीजन भी लगी हुई थी। जबकि इन मरीजों को आ रही दिक्कतों का न तो प्रशासन और न ही इलेक्ट्रिकल विंग के अधिकारियों को परवाह थी। अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में इन दिनों औसतन सौ के करीब मरीज उपचार के लिए आते हैं। इनमें से अधिक मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं, जबकि कुछ मरीजों को सांस की बीमारी भी होती है। ऐसे में उड़ती धूल के कारण इन मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन भी मूक दर्शक बना रहा।
संक्रमण न हो, इसलिए लगाए जा रहे निकास पंखे
मेडिसन वार्ड में काम के दौरान मरीजों को यहां से शिफ्ट किया जा चुका था। कुछ ही मरीज यहां थे। वहीं इमरजेंसी में वेंटिलेशन को लेकर कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में मरीजों को संक्रमण न हो, इसलिए निकास पंखे वार्ड में लगाए जा रहे हैं।
- डॉ. राहुल रॉव, उप चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी
प्रबंधन को मामले से करवाया अवगत
काम शुरू होने से पहले मरीजों को शिफ्ट करने को लेकर प्रबंधन से बात की गई थी। कहा गया था कि यहां पर दाखिल मरीजों को वार्ड में या कहीं और शिफ्ट किया जाए लेकिन इस दौरान यहां दाखिल मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट क्यों नहीं किया गया, यह नहीं मालूम।
- एसआर टोमर, सहायक अभियंता, आईजीएमसी पीडब्ल्यूडी इलेक्ट्रिकल विंग
दीवार से बंद हो गई थीं खिड़कियां
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहले तो खिड़कियां थीं, लेकिन इसके साथ जन औषधि केंद्र खोला गया। इसके बाद से वेंटिलेशन को लेकर सभी खिड़कियां दीवार लगने के बाद बंद हो गईं।
कुछ खिड़कियां ही बच पाईं, जिसके कारण सही तरीके की वेंटिलेशन नहीं हो पा रही थी। इसके बारे में कई मर्तबा प्रशासन को भी अवगत करवाया गया था क्योंकि यहां पर वेंटिलेशन न होने के कारण मरीजों द्वारा छोड़ी गई सांसों से तीमारदार, डॉक्टर समेत यहां पर काम करने वाला स्टाफ बीमारी की जद्द में आ सकते हैं। इसको लेकर डक्स लगाने को लेकर कार्य किया गया, लेकिन यहां पर प्रशासन और इलेक्ट्रिक्ल विंग की लापरवाही के कारण मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
तारों के जंजाल में भी फंसते रहे मरीज
अस्पताल के वार्ड में जब यह कार्य चल रहा था। तो इस दौरान प्लग से ड्रिल के लिए जोड़ी गई तार पर स्ट्रेचर इधर से उधर जा रहे थे, जिसके कारण इन तारों के जंजाल के बीच मरीजों के स्ट्रेचर फंसते रहे।