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मानकों पर खरा नहीं उतर रही हिमाचल में बनी दवाएं, पांच माह में 60 के सैंपल फेल

Fri, 14 Jun 2019 12:07 PM IST
Krishan Singh संतोष कुमार, अमर उजाला, नालागढ़ (सोलन)
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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 फार्मा हब के रूप में उभरे हिमाचल के उद्योगों में बनी दवाएं मानकों पर खरा नहीं उतर रही हैं। पांच माह में 60 दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं। जनवरी माह में देशभर की फेल हुई 45 दवाओं में हिमाचल की 14 दवा, फरवरी में देशभर की 37 दवाओं में 13, मार्च में देशभर की 50 में से 19, अप्रैल में 29 में से 6 और मई माह में 33 में से 8 दवाएं हिमाचल के उद्योगों की फेल हो चुकी हैं। बीते वर्ष देशभर में फेल हुई 350 दवाओं में से हिमाचल की 100 से अधिक दवाओं के सैंपल फेल हो चुके हैं।

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इस वर्ष के पांच माह में 60 दवाएं गुणवत्ता में खरी नहीं उतरी हैं। 45 फीसदी दवा निर्माण का तमगा हासिल करने वाले प्रदेश के लिए दवाओं के सैंपल फेल होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश भर में करीब 750 फार्मा उद्योग स्थापित हैं, जिनमें से कई उद्योगों में निर्मित दवाओं पर सवाल उठते ही रहे हैं और सीडीएससीओ के हर माह के ड्रग अलर्ट के बाद विभाग हरकत में आता है और सैंपल फेल होने वाली दवाओं का बैच मार्केट से उठा लिए जाते हैं। 

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इन जिलों में स्थापित है उद्योग

हर माह के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के ड्रग अलर्ट में हिमाचल की दवाएं शामिल होती हैं। इनमें मुख्य रूप से जिला सोलन, सिरमौर, ऊना और कांगड़ा के उद्योगों की दवाएं हैं।

सबसे अधिक संख्या जिला सोलन के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन के तहत स्थापित हुए फार्मा उद्योगों की रहती है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मारवाह ने बताया कि सरकार ने बद्दी के अलावा नाहन, धर्मशाला व मंडी में लाइसेंसिंग अथॉरिटी बना दी है, जहां सहायक दवा नियंत्रक बैठते हैं।

इससे दवाओं पर नियंत्रण होगा। बद्दी में बन रही ड्रग टेस्टिंग लैब का एमओयू साइन हो चुका है और जल्द ही यह स्थापित कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मौसम में बदलाव के कारण सैंपल फेल होते हैं। 
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