इन बेटियों की आंखों में भले ही रोशनी न हो ... पर हौसले की उड़ान और आगे बढ़ने का जज्बा किसी से कम नहीं है। ये दूसरी बेटियों के साथ कंधे से कंधा मिलाती हैं। इन्होंने साबित कर दिया है कि वे किसी से कम नहीं हैं।
जिक्र हो रहा है आरकेएमवी में बीए छठे सेमेस्टर की छह दृष्टिहीन छात्राओं का। इन्हें किसी के सहारे की जरूरत नहीं। पढ़ाई के साथ ये बेटियां अपनी दिनचर्या के लिए दूसरों पर नहीं, बल्कि खुद पर निर्भर हैं। कॉलेज से हॉस्टल, रूम से डाइनिंग हॉल और क्लासरूम तक जाने में ये पूरी तरह सक्षम हैं।
हालांकि, ट्राइबल छात्रावास में रह रहीं इन छात्राओं को हॉस्टल और कॉलेज कैंपस में सहपाठी भी अपनी तरफ से भरपूर मदद करती हैं। क्लास में आम छात्राओं के साथ बैठकर वे हर लेक्चर के स्टाइलेस इंटरप्वाइंट स्लेट की मदद से ब्रेल में नोट्स बना लेती हैं।
फेसबुक और व्हाट्सऐप भी चलाती हैं ये छात्राएं
मोबाइल ऐप ‘टॉक बैक’ की मदद से वे इंटरनेट से पढ़ाई को जरूरी जानकारी स्वयं प्राप्त कर लेती हैं। लैपटॉप, मोबाइल का पूरा इस्तेमाल कर फेसबुक, व्हॉट्सऐप का प्रयोग करती हैं। कॉलेज में छात्राओं को ब्रेल में लिखी मैगजीन, छात्रावास में सड़क के साथ रूम दिए गए हैं।
ब्रेल में लिखने और पढ़ने में दक्ष इन छात्राओं से बात करने पर उन्होंने बताया कि कॉलेज में दृष्टिहीनों के लिए खास तौर पर बने जॉज (टॉकिंग) सॉफ्टवेयर, पूरा सिलेबस ऑडियो में या फिर ब्रेल में किताबें, सहयोग के लिए स्पेशल एजुकेटर उपलब्ध हों तो वे पढ़ाई में अव्वल आ सकती हैं। आरकेएमवी में उन्हें परीक्षाएं देने को कॉलेज राइटर उपलब्ध करवाया जाता है। रेडियो और टीवी की सुविधा कॉलेज हॉस्टल में है।
कोई सिंगर बनेगी तो किसी का सपना टीचर बनना
ये छात्राएं कई सपने संजोए हैं। मुस्कान अपनी आवाज के बूते सफल प्ले बैक सिंगर बनने का सपना देख रही हैं। म्यूजिक को मेजर विषय के रूप में पढ़ रही हैं। ये हौसला कैसे झुके... पसंदीदा गीत को मुस्कान ने सुनाया। भावना पढ़ाई पूरी कर अपने जैसे मुश्किल जीवन जी रहे बच्चों की स्पेशल एजुकेटर बनकर उनकी राह आसान करना चाहती हैं। कुसुमलता भी आगे की पढ़ाई कर शिक्षिका बनने का सपना संजोए है।
छात्राओं में गजब का साहस और क्षमता : प्राचार्य
कॉलेज प्राचार्य नमृता टिक्कु और छात्रावास वार्डन हिमालया नेगी ने कहा कि ये छात्राएं किसी से कम नहीं हैं। इन्हें कुछ जरूरी सुविधाओं का अभाव है। विभाग और सरकार से सहयोग मिले तो वे हर क्षेत्र में अपने को साबित कर सकती हैं। इनमें गजब की समझ और आगे बढ़ने की क्षमता और साहस है। कॉलेज उनके लिए उपलब्ध संसाधनों में सुविधाएं देने का प्रयास करता है।
उमंग फाउंडेशन भी कर रही है सहयोग
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव का कहना है कि संस्था की ओर से इन छात्राओं को ऐंजल प्लेयर और स्मार्ट केन जैसे उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। कहा कि संस्था ने इनके लिए कॉलेज में एडमिशन और हॉस्टल की सुविधा दिलाने की सहायता की है।