प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की कम होती संख्या का एक बड़ा कारण किराये के एक-दो कमरों में चल रहे प्राइमरी स्कूल भी हैं। बीते दिनों प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुई समीक्षा बैठक में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में 583 प्राइमरी स्कूल किराये के भवनों में चल रहे हैं।
शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लेते हुए जिला उपनिदेशकों को जल्द से जल्द नए स्कूल भवन बनाने के लिए प्रस्ताव भेजने के आदेश दिए हैं। निदेशालय ने प्रदेश में खस्ताहाल हो चुके 20 सरकारी स्कूलों के भवनों को गिरा कर नए भवन बनाने का फैसला भी लिया है।
शिक्षा निदेशालय में हुई समीक्षा बैठक में बताया कि प्रदेश में 583 स्कूलों के पास अपना भवन तक नहीं है। यह स्कूल किराये पर लिए गए एक या दो कमरों में चल रहे हैं। इन स्कूलों में फर्नीचर, स्टाफ रूम, खेल मैदान सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में शिक्षा निदेशक ने इन स्कूलों के लिए नए भवन बनाने का फैसला लिया है।
जिला उपनिदेशकों को कहा गया है कि जल्द से जल्द इन स्कूलों में निर्माण कार्य शुरू करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाए। निदेशालय को भेजे जाने वाले प्रस्ताव में फर्नीचर और बिजली की व्यवस्था का एस्टिमेट भी भेजा जाए। निदेशालय ने शिमला, मंडी और कांगड़ा जिले
में स्थित 20 ऐसे स्कूलों को भी दोबारा बनाने का फैसला लिया है, जिनकी हालत खस्ता हो चुकी है। हिमाचल सरकार प्राइवेट स्कूलों की बराबरी करने का दावा करती है लेकिन प्राइमरी स्कूलों में सुविधाएं नाममात्र की भी नहीं दे पा रही है। इस कारण ही सरकारी स्कूलों में लगातार विद्यार्थियों की संख्या गिर रही है।