पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे और भाजपा नेता अरुण धूमल ने कहा है कि सोलन के कंडाघाट में जमीन की खरीद-फरोख्त में हुई धांधली में वन विभाग की बड़ी भूमिका है। इस मामले में फरीदाबाद के मुख्य आरोपी ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया है कि उसने इस सौदे के लिए करीब 56 लाख रुपये की रिश्वत दी थी।
जिसे प्रदेश के वन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया गया। अरुण धूमल शुक्रवार को सोलन में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एनआरआई को कंडाघाट में जमीन उपलब्ध करवाने के एवज में यह सारी धांधली हुई है। जिसके संबंध में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फरीदाबाद थाना में केस दर्ज किया गया है। मामले के आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि उसने स्टीव बेदी से एक करोड़ बीस लाख रुपये लिए थे।
वनमंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री तक रकम पहुंचने का लगाया आरोप
जिसमें से 70 लाख रुपये उसका मार्च-2014 से अप्रैल 2015 तक का वेतन था, जो पांच लाख रुपये प्रतिमाह तय था। जबकि 56 लाख रुपये उसने इस कार्य के एवज में रिश्वत के तौर पर दिए थे।
जोकि प्रदेश के वनमंत्री के माध्यम से सीएम के नाम पर दिए गए। अरुण धूमल ने बताया कि उनके पास इस बात के प्रमाण हैं कि वन विभाग के माध्यम से मुख्यमंत्री तक धनराशि पहुंचती रही है।
फरीदाबाद में हुई एफआईआर में पीड़ित ने आरोपी पर हिमाचल की राजनीति में कनेक्शन और मुख्यमंत्री के साथ संबंध की बात कही है। इसके अलावा मामले का मुख्य आरोपी कई बार मुख्यमंत्री और वनमंत्री के साथ नजर आया है।
जिसके फोटो भी अरुण धूमल ने मीडिया के सामने उजागर किए, जिसमें मामले का आरोपी गिफ्ट देते हुए नजर आ रहा है। कहा कि न्यायिक प्रक्रिया सरल नहीं है।
इसलिए वे इस पूरे मामले को जनता के बीच लेकर जाएंगे और आगामी विधानसभा चुनाव में अब लोग ही फैसला देंगे कि उन्हें कैसा मुख्यमंत्री चाहिए।
किसी पर भी आरोप लगा देते हैं धूमल परिवार के लोग: वनमंत्री
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी
- फोटो : File Photo
वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने ऐसी किसी भी सौदेबाजी की जानकारी से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि धूमल परिवार की राजनीतिक साख खतरे में है। जिसे बचाने के लिए वे किसी पर भी आरोप लगा देते हैं।
जमीनों की खरीद-फरोख्त पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के समय में हुई है और वन विभाग की कई बीघा जमीन भाजपा अपने चहेतों में बांट चुकी है। वनमंत्री के अनुसार ऐसे आरोपों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लोग जानते हैं मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी छवि बेदाग है।