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सबसे बड़े अस्पताल में नहीं मिल रही दवाइयां, मुश्किल में मरीज

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। प्रदेश के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान आईजीएमसी में सरकारी सिविल सप्लाई की दुकानों में जीवन रक्षक दवाएं नहीं मिल रही हैं। खाद्य आपूर्ति सरकारी दुकानों में करीब दो हजार दवाएं बाजार से सस्ते दामों पर बेचता है। जीएसटी लागू होने के बाद प्रत्येक दवा पर अलग अलग टैक्स निर्धारित किया गया है। इसका सॉफ्टवेयर अब तक खाद्य आपूर्ति तैयार नहीं करवा पाया है लिहाजा सरकारी दुकानों में दवाएं नहीं बिक रही। अब जब सॉफ्टवेयर तैयार होगा उसी के बाद मरीजों को दवा मिल पाएगी तब तक खाद्य आपूर्ति ने दवा न बेचने का फैसला लिया है इसका सीधा असर मरीजों की जेब पर पड़ रहा है उन्हें महंगे दामों पर बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद ही खाद्य आपूर्ति सस्ती दवाएं बेच पाऐगा। अब सॉफ्टवेयर कब तक अपडेट होगा इसका सटीक जवाब फिलहाल खाद्य आपूर्ति के पास भी नहीं है।
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सिविल सप्लाई के पास करीब दो हजार दवाएं हैं। जीएसटी लागू होने के बाद अब अलग अलग दवाओं का अलग टैक्स होगा। किस दवा में कितना टैक्स कटेगा। इसकी जानकारी ली जा रही है। इसके बाद साफ्टवेयर को अपडेट किया जाएगा तभी दवाएं बेच पाऐंगे।
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कार्यकारी निदेशक एचपी स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन
सुमित खिमटा
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सॉफ्टवेयर अपडेट होने तक होगी मुश्किल
सॉफ्टवेयर अपडेट होने तक मरीजों को परेशान होना पड़ेगा। दूसरा कारण यह भी है कि संचालकों को नहीं पता कि किन दवाइयों पर कितना जीएसटी लगा है।
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10 तारीख को आए दवा लेने
शिमला। कुछ दुकानों में यह अफवाह फैलाई जा रही है कि 10 तारीख को दवा लेने आएं। तब तक दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी। विभाग की लेटलतीफी इन मरीजों पर भारी पड़ सकती है।
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