प्रारंभिक आंकड़ों में नर्सरी और केजी कक्षाओं के हजारों नौनिहाल विद्यार्थियों को शामिल ही नहीं किया गया था, इस कारण लाभार्थियों की संख्या करीब 50 हजार कम दर्ज हो गई थी। अब स्कूल शिक्षा निदेशालय ने जिलों से संशोधित डाटा प्राप्त कर खरीद प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के अनुसार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निशुल्क पानी की बोतलें उपलब्ध करवाने की योजना में बड़ा तथ्य सामने आया है। प्रारंभिक आंकड़ों में नर्सरी और केजी कक्षाओं के हजारों नौनिहाल विद्यार्थियों को शामिल ही नहीं किया गया था, इस कारण लाभार्थियों की संख्या करीब 50 हजार कम दर्ज हो गई थी।
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अब स्कूल शिक्षा निदेशालय ने जिलों से संशोधित डाटा प्राप्त कर खरीद प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी है। पहले तैयार किए गए आंकड़ों में यू-डाइस पोर्टल के डाटा के आधार पर विद्यार्थियों की संख्या तय की गई थी। बाद में जब स्कूलों से जमीनी स्तर पर वास्तविक नामांकन का मिलान किया गया तो पता चला कि नर्सरी और केजी कक्षाओं में अध्ययनरत बड़ी संख्या में बच्चे सूची से बाहर रह गए हैं।
इससे लाभार्थी विद्यार्थियों की संख्या में लगभग 50 हजार का अंतर सामने आया। मामला सामने आने के बाद सभी जिलों से संशोधित और सत्यापित आंकड़े प्राप्त किए गए। नए डाटा के अनुसार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक पढ़ने वाले लगभग 7.37 लाख विद्यार्थियों को निशुल्क पानी की बोतलें उपलब्ध करवाई जाएंगी।
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अब निदेशालय ने बोतलों की खरीद और आपूर्ति संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष के बजट में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पानी की बोतलें उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वच्छ पेयजल के उपयोग को बढ़ावा देना और स्कूलों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाना है। योजना में प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को एक निशुल्क पानी की बोतल दी जानी है।