आईजीएमसी शिमला की ओर से वर्ष 1986 में 18 से 80 साल के पुरुषों और महिलाओं पर शोध किया गया तो दमे या सांस फूलने की बीमारी के धूम्रपान, घरों का धुआं जैसे कारण ही ज्यादा रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में इस पर शोध करने की जरूरत है कि अब बगैर धूम्रपान के भी सीओपीडी रोगियों के सामने आने के क्या कारण हैं?
सीओपीडी के मरीज ही आ रहे सबसे ज्यादा- हाल ही में सामने आए टांडा मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू और सीएमसीएच पठानकोट के एक संयुक्त शोध में ये बात सामने आई है कि ग्रामीण उत्तरी-पश्चिमी भारतीय क्षेत्रों जिनमें हिमाचल प्रदेश भी आता है इनकी कुल जनसंख्या में से 3.36 प्रतिशत लोगों में क्रोनिक ब्रोंकाइटिस,
1.18 प्रतिशत लोगों में ब्रोंकियल दमा और 4.21 फीसदी लोगों में क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टरी पल्मनरी डिजीज (सीओपीडी) पाई गई है। यानी सीओपीडी के मरीज ही सबसे ज्यादा आ रहे हैं। सीओपीडी का प्रमुख लक्षण सांस लेने में तकलीफ होना और थूक के साथ कफ का बनना होता है। ये बीमारी लगातार बढ़ती जाती है।