विश्वास भारद्वाज
शिमला। ग्रैंड होटल के वीवीआईपी ‘मायो ब्लॉक’ का नवीनीकरण के बाद जून माह में लोकार्पण होना था लेकिन ठीक एक महीने पहले यह आग की भेंट चढ़ गया। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग सवा करोड़ की लागत से इस ब्लॉक सहित अन्य भवनों का नवीनीकरण करवा रहा था। निर्माण कार्य के अंतिम चरण में हुआ यह अग्निकांड कई सवाल खड़े कर रहा है।
ग्रैंड होटल के प्रवेश द्वार से सटे वीवीआईपी ‘मायो ब्लॉक’ के लिए दस महीने पहले ही बुकिंग बंद कर दी थी। मायो ब्लॉक के निर्माण में इस्तेमाल की लकड़ी गलने से यह तीन मंजिला भवन असुरक्षित हो गया था। नवंबर 2018 में इस ब्लॉक की मरम्मत शुरू की गई। नवीनीकरण के बाद ‘मायो ब्लॉक’ में फर्श और सिलिंग को आकर्षक बनाया गया था। दीवारें भी मजबूत और आकर्षक बनाई जा रही थीं। शौचालयों का आधुनिकीकरण और एलईडी लाइटिंग भी प्रोजेक्ट में शामिल थीं। एडवांस फायर फाइटिंग सिस्टम लगाना भी प्रस्तावित था। सीपीडब्ल्यूडी ने नवीनीकरण का काम दिल्ली के एक ठेकेदार को सौंप रखा था। मरम्मत कार्य के चलते मायो ब्लॉक का बिजली कनेक्शन कटवा दिया था लेकिन ठेकेदार ने काम के लिए बिजली का अस्थाई कनेक्शन ले रखा था। इसकी मीटर भी मायो ब्लॉक में ही लगा था। निर्माणाधीन भवन में सुरक्षा का जिम्मा भी ठेकेदार के सुपुर्द था।
अग्निकांड मामले में एफआईआर दर्ज : शुक्ला
डीएसपी हेड क्वार्टर प्रमोद शुक्ला ने कहा कि ग्रैंड होटल अग्निकांड मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। निर्माण कार्य से संबंधित दस्तावेजों की भी पुलिस जांच करेगी। मामले में सभी संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी।
आधे घंटे बाद पहुंचे चार वाटर टेंडर : प्रत्यक्षदर्शी
ग्रैंड होटल में जिस समय आग लगी होटल के सुरक्षा गार्ड प्रवीण कुमार मौके पर मौजूद थे। प्रवीण ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि 12:30 बजे वह स्वागत कक्ष पर थे कि अचानक मायो ब्लाक से आग की लपटें उठती दिखीं। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना सिक्योरिटी सुपरवाइजर और रिसेप्शन में तैनात कर्मी को दी। इसके बाद पुलिस को सूचना देने के लिए वह सीटीओ की ओर भागे। पुलिस गुमटी पहुंचे तो वहां तैनात पुलिस कर्मी ने बताया कि आग की लपटें दिखने के बाद उन्होंने पहले ही अग्निशमन विभाग को सूचना दे दी है। आधे घंटे बाद चार वाटर टेंडर मौके पर पहुंचे। होटल स्टॉफ भी गेट पर पहुंच गया था। मायो ब्लॉक के बाद आग फैल कर इस्टेट आफिस तक पहुंची। करीब तीन घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। आग बुझाते हुए होटल के हाउस कीपिंग सुपरवाइजर सुशील कुमार को चोट भी लग गई।
दो मिनट में पहुंचे दो वाटर टेंडर और 20 कर्मी : डीसी शर्मा
मंडलीय अग्निशमन अधिकारी धर्मचंद शर्मा का दावा है कि 12:42 बजे गृह रक्षक शिशुपाल ने मोबाइल से फोन कर अग्निकांड की सूचना दी। 12:44 बजे दो वाटर टेंडर और 20 कर्मी घटनास्थल की ओर रवाना हो गए। इसके बाद छोटा शिमला और बालूगंज से भी वाटर टेंडर और कर्मी बुलाए गए। अग्निशमन कर्मियों ने तीन घंटे कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस अग्निकांड में करीब 20 लाख नुकसान आंका है। आग से करीब 10 करोड़ की संपत्ति बचाई है।
फिर खुली फायर हाईड्रेंट की पोल
ग्रैंड होटल में लगी आग पर काबू पाने के लिए जब अग्निशमन विभाग के कर्मियों ने गेट पर लगे फायर हाइड्रेंट को खोला तो इसमें पानी का प्रेशर बेहद कम था, जो आग बुझाने के लिए नाकाफी थी। शहर में लगे फायर हाइड्रेंट के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम का है, लेकिन शहर के अधिकतर फायर हाईड्रेंट सूख कर बंद हो चुके हैं। अग्निशमन विभाग के डीएफओ डीसी शर्मा ने बताया कि होटल परिसर में स्थापित 40 हजार लीटर क्षमता के पानी के टैंक से पाइपें जोड़ कर आग बुझाई गई।
ग्रैंड होटल का इतिहास, 1922 में लगी थी आग
ग्रैंड होटल के स्थान पर 1829 में गवर्नर जनरल लार्ड विलियम बैंटिक ने बैंटिक कासल की स्थापना की। 1850 से 1887 तक यह सिमला बैंक के अधिकार में रहा। इसके बाद इसे 35 हजार में न्यू क्लब ने खरीदा। 1892 में ‘वायसरीगल कन्फेक्शनर’ शेवालेय पेलिटि ने इसे 2 लाख में खरीद कर शिमला का सबसे बड़ा होटल बनाया। 1922 में लगी आग में होटल के तीन ब्लॉक जल गए और 1930 तक इनका पुनर्निर्माण कर दिया गया।
मायो ब्लॉक के पीछे जल भराव, दीवार तोड़ कर निकाला
आग बुझाते हुए भारी मात्रा में पानी का इस्तेमाल होने से मायो ब्लॉक के पीछे जल भराव हो गया। कमर तक भरे पानी के बीच ग्रैंड होटल के कर्मी बाबू राम ने दीवार तोड़ कर पानी बाहर निकाला। बाबू राम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने के बाद कर्मियों को क्वार्टरों से होटल बुला लिया था।
कंप्यूटर खराब, फाइलें धूप में रख कर सुखाई
अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए पानी की तेज बौछार का इस्तेमाल किया जिससे होटल के कार्यालय में रखी फाइलें और कंप्यूटर खराब हो गए। सोमवार को होटल कर्मियों ने कंप्यूटर बाहर निकाले और फाइलें धूप में रख कर सुखाई।