कारोबारियों के लिए मुसीबत बना जीएसटी
एक साल बाद भी रिटर्न भरने की प्रक्रिया जटिल
बीस फीसदी तक घटा सोने-चांदी का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एक साल बीतने के बाद भी वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) शहर के ज्यादातर कारोबारियों के लिए मुसीबत बना हुआ है। पिछले साल एक जुलाई को लागू हुए जीएसटी से राजधानी में सोने-चांदी का कारोबार बीस फीसदी तक घट गया है। गहनों की खरीद में नकदी का इस्तेमाल घटने और पैनकार्ड की अनिवार्यता से कारोबार में गिरावट आई है। हालांकि, दूसरी वस्तुओं की बिक्री में ज्यादा असर नहीं पड़ा है। वहीं, सालभर में कई बदलाव होने के बावजूद जीएसटी के कई पहलुओं पर कारोबारियों की मुश्किलें कम नहीं हो रहीं।मासिक, वार्षिक और तीन माह बाद के रिटर्न भरने को लेकर कारोबारी असमंजस में हैं। ई वेल बिल, रिटर्न भरने और पूरा हिसाब रखने संबंधी जानकारी न होने के कारण छोटे कारोबारियों को अब भी पैसा देकर अकाउंटेंट बिठाने पड़ रहे हैं।
1. जीएसटी के सरलीकरण का इंतजार
जीएसटी की इस व्यवस्था से अभी भी कारोबारी परेशान हैं। पहले तीन माह बाद रिटर्न भरते थे, अब मासिक भरना पड़ता है। हिसाब रखने में समय बर्बाद हो रहा है। कमाई भी घट गई है। अभी भी व्यापारियों को विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। साल बाद भी कारोबारी उलझा हुआ है। हमें अभी भी इस प्रक्रिया के सरल होने का इंतजार है।
इंद्रजीत सिंह, अध्यक्ष शिमला व्यापार मंडल
2. खरीदारी घटी, लेकिन कारोबारी खुश
नकदी के कम इस्तेमाल और पैनकार्ड की अनिवार्यता के चलते इस साल करीब 20 फीसदी तक कारोबार घटा है। लेकिन सर्राफा कारोबारी जीएसटी से खुश हैं। अब दिक्कतें कम होने लगी हैं। जब जीएसटी पूर्ण तरीके से लागू हो जाएगा तो दिक्कत भी खत्म हो जाएगी। कारोबारियों को इसके छूट के रूप में इसके फायदे भी मिलने लगेंगे।
अतुल टांगरी, अध्यक्ष, सर्राफा एवं स्वर्णकार संघ, हिमाचल प्रदेश
3. रिटर्न की एक ही तारीख तय होनी चाहिए
जीएसटी भरने की तीन की बजाय एक ही डेट तय होनी चाहिए। बाहरी माल पर तो ई-वेल बिल ठीक है, लेकिन प्रदेश के भीतर यह नहीं होना चाहिए। तकनीकी खराबी के चलते पोर्टल में वेलिड जीएसटी नंबर भी कई बार गलत दर्शाया जाता है। इसे बार-बार डालना पड़ता है। जीएसटी बदलावों के बारे में कारोबारियों को जागरूक किया जाए।
धर्मपाल पुरी, कारोबारी शिमला
4. कारोबारियों को रखना पड़ रहा अकाउंटेंट
जीएसटी भरने की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए। छोटे कारोबारियों को ई वेल बिल निकालना और कंप्यूटर पर सारी औपचारिकताएं पूरी करना आसान नहीं। ऐसे में ज्यादातर कारोबारियों को अभी भी पैसा देकर अकाउंटेंट की मदद लेनी पड़ रही है। प्रदेश में भी जीएसटी की लिमिट पंजाब और हरियाणा की तर्ज पर होनी चाहिए।
नितिन, पदाधिकारी व्यापार मंडल शिमला
5. अभी काफी सुधार की जरूरत
किसको माल बेचा है, अभी उसका जीएसटी नंबर भी देना पड़ रहा है। यह शर्त खत्म होनी चाहिए। जीएसटी नंबर मिसमैच होने से कई बार पैनल्टी चुकानी पड़ती है। इसीलिए होलसेलर को सिर्फ अपनी सेल और जीएसटी नंबर की शर्त होनी चाहिए। वार्षिक रिटर्न की शर्त भी खत्म होनी चाहिए। इसके अलावा 20 लाख तक की लिमिट भी लागू होने का इंतजार है।
संजीव ठाकुर, महासचिव, व्यापार मंडल शिमला