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सैहबकर्मियों को पूरी सैलरी मिलेगी या नहीं, 6 को फैसला

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अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला।
सैहब सोसायटी के हड़ताली कर्मचारियों की तनख्वाह कटेगी या नहीं, इस पर छह अक्तूबर को फैसला लिया जाएगा। नगर निगम आयुक्त जीसी नेगी ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली है। सैहब कर्मचारी यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल भी मंगलवार को इस मामले को लेकर आयुक्त से मिला। यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने कहा कि हड़ताल खत्म करते वक्त प्रशासन ने यह भरोसा दिलाया था कि कर्मचारियों को पूरी तनख्वाह दी जाएगी। अध्यक्ष ने कहा कि कर्मचारी जब काम पर लौटे तो रविवार के दिन भी छुट्टी नहीं की। पूरे शहर में सफाई की गई। ऐसे में तनख्वाह पूरे महीने की दी जानी चाहिए। सैहब कर्मचारी पिछले महीने करीब 20 दिन हड़ताल पर रहे थे। ऐसे में इन्हें पूरे महीने की तनख्वाह देनी है या नहीं, इस पर फैसला लिया जाना है। प्रशासन ने पहले तो तनख्वाह काटने का दावा किया था लेकिन बाद में समझौते के तहत पूरी तनख्वाह देने की बात मान ली थी। नगर निगम आयुक्त जीसी नेगी ने बताया कि छह अक्तूबर को अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक में आखिरी फैसला लिया जाएगा।
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कर्मचारियों और संयुक्त आयुक्त में नोंकझोंक
शिमला। आयुक्त कार्यालय में कर्मचारी नेताओं और संयुक्त आयुक्त प्रशांत सरकैक के बीच हल्की नोंकझोंक भी हुई। संयुक्त आयुक्त ने पूछा कि हड़ताल के बाद भी आखिर क्यों सब कर्मचारी कूड़ा उठाने नहीं पहुंच रहे। क्यों कई वार्डों से कूड़ा न उठने की शिकायतें आ रही हैं। तो इस पर कर्मचारियों की उनसे बहस हो गई। कर्मचारी बोले कि निगम के कर्मी भी तो नहीं आ रहे। बाद में यूनियन अध्यक्ष जसवंत सिंह ने आरोप लगाया कि संयुक्त आयुक्त ने उनके साथ अभद्र भाषा का उपयोग किया। वहीं, संयुक्त आयुक्त प्रशांत सरकैक ने कहा कि कोई अभद्र बर्ताव नहीं किया गया। सारी बात आयुक्त के सामने हुई। कर्मचारियों से सिर्फ यही पूछा था कि हर वार्ड में कूड़ा क्यों नहीं उठ रहा। लेकिन कर्मचारी जवाब देने की बजाय सवाल कर रहे थे।
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