शिमला। अब कॉलेज के शिक्षक भी छात्रों को पीएचडी करवा सकेंगे। यूजीसी 2016 के नियमों के तहत कॉलेज शिक्षकाें को पीएचडी करवाने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, कॉलेज शिक्षकों को पीएचडी करवाने के प्रस्ताव को काफी पहले मंजूरी दी जा चुकी है लेकिन विवि ऑडिनेंस में इसे दर्ज नहीं किया गया था। साथ ही कोई ऐसे नियम या शर्तें भी तय नहीं थीं जिसके तहत ये शिक्षक पीएचडी करवा सकें। अब हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने विवि ऑर्डिनेंस में संशोधन कर इसे शामिल करने को मंजूरी दे दी है।
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में मंगलवार को कुलपति प्रो. राजेंद्र चौहान की अध्यक्षता में हुई कार्यकारी परिषद में इस मामले पर चर्चा की गई। कहा गया कि पीएचडी करवाने के लिए कॉलेज शिक्षकों के लिए क्या-क्या शर्तें और नियम बनाए जाने चाहिए। इस बारे में जल्द ही प्रस्ताव तैयार होगा। इसमें तय हो जाएगा कि किन विषयों में कितना अनुभव रखने वाला शिक्षक पीएचडी करवा सकेगा। कॉलेज शिक्षकों से भी इस बारे में सुझाव लिए जाएंगे।
छात्रों को होगा फायदा
विवि ऑर्डिनेंस में संशोधन और नियम तय होने के बाद कॉलेज शिक्षक पीएचडी करवा सकेंगे। इस समय सिर्फ यूनिवर्सिटी के शिक्षक ही पीएचडी करवाते हैं। एक शिक्षक आठ छात्रों को पीएचडी करवा सकता है। ऐसे में सैकड़ों छात्रों को पीएचडी के लिए गाइड नहीं मिल पाता। कॉलेज शिक्षकों के गाइड बनने से हजारों छात्र पीएचडी कर पाएंगे।
ये फैसले भी लिए गए
कार्यकारी परिषद की बैठक में तीन अगस्त को हुई अकादमिक परिषद की बैठक के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। साथ ही तकनीकी स्टाफ की भर्ती संबंधी नियमों को भी मंजूरी दी गई। बैठक में कुलपति के अलावा कुलसचिव प्रो. एसएस नारटा, करसोग कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. कमलकांत, डीन प्रो. एसएस चौहान, अतिरिक्त शिक्षा सचिव डॉ. श्यामा जोशी, आरआर पटियाल और उप वित्त सचिव रिखीराम भी मौजूद रहे।