शिक्षा विभाग की गलती का खामियाजा 543 पोस्ट ग्रेजुएट टीचरों को 4,66,54,560 रुपये चुका कर भुगतना होगा। यानी एक पीजीटी को 48 महीने (अक्तूबर 2012 से सितंबर 2016) के 85,920 रुपये चुकाने होंगे। वित्त महकमे की अधिसूचना को गलत तरीके से लागू करने के चलते शिक्षा निदेशालय ने अक्तूबर 2012 के बाद नियमित हुए पीजीटी से रिकवरी का फैसला लिया है।
ऐसे में इन शिक्षकों से 1790 रुपये माह के हिसाब से रिकवरी होगी। अक्तूबर 2012 से लेकर सितंबर 2016 तक की एक पीजीटी की रिकवरी करीब 85,920 रुपये बनती है। संभावित है कि शिक्षकों से की जाने वाली रिकवरी भविष्य में मिलने वाले इंक्रीमेंट में एडजस्ट भी जा सकती है। हालांकि, अभी तय नहीं है कि रिकवरी किस तरह से की जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक दिनकर बुराथोकी ने बताया कि रिकवरी को लेकर जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे।
पीजीटी को गलती से दे दिया उच्च वेतनमान
शिक्षा विभाग ने स्कूलों में तैनात 543 पीजीटी का वेतन कम कर दिया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन पीजीटी को गलती से उच्च वेतनमान दे दिया था। कई सालों तक वेतन देने के बाद अब शिक्षा विभाग ने अपनी गलती को सुधारते हुए यह फैसला किया है। इस बारे में शिक्षा विभाग ने प्रदेश में कार्यरत सैकड़ों पीजीटी के वेतनमान को कम करने के निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीडीओ पावर रखने वाले अधिकारियों को इस बाबत सूचना प्रेषित करके 15 अक्तूूबर तक अपने-अपने क्षेत्र में कार्यरत पीजीटी की सर्विस बुक में रिकार्ड दुरुस्त करने को कहा है तथा तब तक प्रत्येक अध्यापक का वेतन रोक देने के आदेश दिए हैं।
विभाग के इस फैसले से प्रदेश का एक बड़ा शिक्षक वर्ग सकते में आ गया है। शिक्षा विभाग में उन पीजीटी का वेतनमान कम कर दिया है, जो पहली अक्तूबर 2012 के बाद नियुक्त या नियमित किए गए हैं। इन शिक्षकों को 16290 रुपये का वेतन प्रदान किया जा रहा था। साल 2016 में जो पीजीटी अनुबंध आधार पर नियुक्त या नियमित हुए, उन्हें 14500 रुपये का वेतनमान दिया गया।
वेतन कटौती के विरोध में कोर्ट जाएगा प्रवक्ता संघ
पीजीटी के वेतन में कटौती का मामला पीजीटी संघ ने कोर्ट ले जाने की तैयारी शुरू कर दी है। स्कूल प्रवक्ता संघ ने शिक्षा विभाग से वेतन कटौती के आदेश वापस लेने की मांग की है। संघ ने चेताया है कि अगर आदेश निरस्त नहीं किए गए तो कोर्ट जाने को विवश होंगे। प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष डा. अश्वनी कुमार ने शिक्षा निदेशक पर वित्त महकमे की अधिसूचना की परिभाषा बदलने का आरोप लगाया है।
उन्होंने राज्य सरकार से पंजाब के वेतनमान को लागू करने की मांग करते हुए 5400 ग्रेड पे के साथ 20300 इनिशियल स्टार्ट का हक जताया है। प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ के अध्यक्ष डा. अश्वनी कुमार ने बताया कि वेतन के मामले में हिमाचल पंजाब का अनुसरण करता है, लेकिन शिक्षा निदेशक चार साल बाद पंजाब सरकार, प्रदेश सरकार और राज्यपाल की ओर से अधिसूचित अधिसूचना की परिभाषा ही बदल रहे हैं।
अधिसूचना की व्याख्या गलत तरीके से कर वेतन में कटौती की जा रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल पंजाब के वेतनमान को मानने के लिए बाध्य है। पंजाब सरकार के वित्त विभाग की 9 दिसंबर 2011 की अधिसूचना के तहत प्रवक्ताओं का नया वेतनमान लागू किया गया है।
शिक्षा निदेशक पर लगाया अधिसूचना की परिभाषा बदलने का आरोप
हिमाचल प्रदेश सरकार
संशोधित वेतनमान के तहत एक दिसंबर 2011 से पे बैंड 10300-34800, ग्रेड पे के साथ 5400 इनिशियल स्टार्ट 20300 दिया गया है। डा. अश्वनी कुमार ने बताया कि प्रदेश वित्त महकमे की 27 सितंबर 2012 की अधिसूचना के तहत विभिन्न श्रेणियों, पदों को नियम संख्या तीन के तहत प्रवक्ताओं को इस शेड्यूल में कम संख्या 12 में जोड़ा गया है। इसके तहत प्रवक्ताओं/पीजीटी का वेतनमान पे बैंड 10300-34800, ग्रेड पे 4200 के साथ इनिशियल स्टार्ट 16,290 दर्शाया गया है।
पे बैंड 10300-34800, ग्रेड पे 5400 दो साल की नियमित सेवा के बाद देने की बात अधिसूचना में कही गई है। उन्होंने कहा इस अधिसूचना के तहत स्पष्ट है कि पीजीटी का वेतनमान 16290 बनता है। जबकि पंजाब की अधिसूचना के मुताबिक पीजीटी 20300 इनिशियल स्टार्ट के हकदार हैं। संघ से मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप कर शिक्षकों को राहत देने की मांग की है।