हिमाचल में कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत आने वाली 74 कंपनियों से मिलने वाली धनराशि को प्रदेश के सभी क्षेत्रों में खर्च करने को केंद्र से मंजूरी मांगी जाएगी। विधायक होशियार सिंह के सवाल पर उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का इसमें हस्तक्षेप नहीं होता है। केंद्रीय कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय का इस पर नियंत्रण है। उन्होंने केंद्र से यह मामला उठाने का आश्वासन दिया।
विधायक होशियार सिंह ने कहा कि प्रदेश में कुछ जगह ही सीएसआर का पैसा खर्च हो रहा है। पांच बड़ी कंपनियों का लाभ सात हजार करोड़ है। ऐसे में सीएसआर का इन्हीं कंपनियों से बहुत अधिक पैसा मिलना चाहिए, लेकिन वास्तविकता में कम पैसा मिल रहा है। उद्योग मंत्री ने बताया कि कंपनियां अपने कार्य क्षेत्र के आसपास ही सीएसआर के तहत पैसा खर्च करती हैं। लाभ का दो फीसदी सीएसआर पर खर्च करना होता है। केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग करेंगे कि इस धनराशि को अन्य जगह भी खर्च किया जा सके।
तल्खी से क्यों पूछ रहे हो, प्यार से भी बता दूंगा
सीएसआर का पैसा सभी क्षेत्रों में खर्च न होने का आरोप लगाते हुए देहरा से विधायक होशियार सिंह ने कड़े तेवर दिखाते हुए सदन में सवाल उठाया। सवाल का जवाब देते हुए उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने कहा कि तल्खी से क्यों पूछ रहे हो, प्यार से भी बता दूंगा। इसको लेकर सदन में ठहाके लगे।
विश्व बैंक पोषित बागवानी परियोजना के तहत दो साल में 92.28 करोड़ रुपये खर्चे गए हैं। विधायक जगत नेगी के सवाल के लिखित जवाब में बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बताया कि 2018-19 में स्वीकृत बजट 100 करोड़ था। इसमें 49.15 करोड़ खर्च किए गए। 2019-20 में 120 करोड़ के बजट का प्रावधान है।
इसमें 43.13 करोड़ खर्चे गए हैं। यह राशि बागवानी उत्पादन, विविधिकरण, मूल्य संवर्धन व कृषि आधारित व्यवसायों को बढ़ावा देने, कृषि उपज मंडियों का आधुनिकीकरण व विपणन सुविधाओं को विकसित करने पर खर्ची गई है।
बागवानी विभाग ने विदेश से मंगवाए पांच लाख सेब पौधे साल 2019-20 के दौरान रोपे हैं। इनसे दो लाख पौधे जीवित नहीं रह सके। प्रदेश में 5 जगह बगथान, पालमपुर, झामर, समराहन और बजौरा में बनाई गईं नर्सरियों में ये पौधे रोपे गए।
सरकार ने नवंबर 2020 से इन पौधों की बिक्री करने का लक्ष्य रखा है। विधायक राकेश सिंघा के सवाल के लिखित जवाब में बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने यह जानकारी दी। बताया कि पौधों की देखभाल को 31 लोग नियुक्त किए गए हैं।
जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि हिमाचल में पेयजल और सिंचाई योजनाएं तैयार की जा रही हैं। नगरोटा बगवां में 4 पंचायतें जल शक्ति मंडल कांगड़ा में समाहित की गई हैं। इस मंडल में सरकार कनिष्ठ अभियंता का अतिरिक्त पद सृजित किया गया है।
मंत्री ने यह जानकारी नगरोटा के विधायक अरुण कुमार की ओर से पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। जल मंत्री ने कहा कि उप सेक्शन कंडी बनाने के लिए सरकार विभागीय औपचारिकताएं पूरा कर रही है। अब मामले में सरकारी स्तर पर निर्णय लिया जाना अपेक्षित है।