वर्ष 2000 के बाद यह आंकड़ा 200 के पार पहुंच गया। दशहरा उत्सव समिति के राजस्व रिकॉर्ड में पंजीकृत 290 देवी-देवताओं में 130 गैर माफीदार, माफीदार 142 और आठ देवरथ बिना बुलाए पहुंचे हैं।
सेवानिवृत्त जिला भाषा अधिकारी डॉ. सीता राम ठाकुर ने कहा कि 17वीं शताब्दी के दौरान दशहरा में 365 देवी-देवताओं ने भाग लिया था, लेकिन पिछले 300 सालों में पहली बार दशहरा में 280 देवरथ दशहरा की शान बढ़ाने पहुंचे हैं।
भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि ढालपुर मैदान में वर्ष 1660 से कुल्लू दशहरे का आयोजन किया जा रहा है। इससे पहले मणिकर्ण और नग्गर में भी दशहरे का आयोजन किया जाता रहा है।