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हिमाचल में 19 महीने में बढ़े 26250 बेरोजगार, विधानसभा में उठा मामला

Sat, 14 Dec 2019 11:54 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तपोवन (धर्मशाला)
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सांकेतिक तस्वीर
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हिमाचल के रोजगार कार्यालय में बेरोजगारों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। पिछले 19 महीने में प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या में 26,250 बढ़ी है। यह जानकारी श्रम एवं रोजगार मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने ठियोग के विधायक राकेश सिंघा के सवाल की लिखित जवाब मे दी है। 

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जिला         अप्रैल, 2018      अक्तूबर, 2019
बिलासपुर     53,877           55,793
चंबा              56,743           62,267
हमीरपुर         67, 342         67, 094
कांगड़ा            1,88,702       1,96, 965
किन्नौर           9,297              9,071
कुल्लू               46,416           49,992
लाहौल-स्पीति    4481              5095
मंडी                 1,48,518      1,54,321
शिमला             81,431         78,849
सिरमौर             57,615        59,354
सोलन                59,735        58,820
ऊना                   63,310         65,996

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हरियाणा के कुंडली में अपनी जमीन बेचेगी सरकार

हरियाणा के कुंडली में हिमाचल सरकार अपनी जमीन बेचेगी। यह फैसला वीरवार देर रात हुई हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक में गुपचुच तरीके से लिया गया। शुक्रवार को प्रश्न काल शुरू होने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यह गलत फैसला है और हिमाचल के हित के खिलाफ है। उन्होंने इस बारे में सरकार से  मामले की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। 

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि इस जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है और इसकी देखरेख लागत दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। साथ ही इस जमीन का उपयोग भी नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री बेचने में भी हिमाचल की हित की बात कर रहे हैं। दिल्ली से 40-45 किलोमीटर की दूरी पर यह जमीन है, यहां से दिल्ली जाने में 50 मिनट लगते हैं, इसे बेचने की मंशा ठीक नहीं है।

इसे मंत्रिमंडल की उपसमिति को भेजा जाए। इस पर सरकार ने असहमति जताई। इससे पहले मुख्यमंत्री ने अपने जवाब में हरियाणा के कुंडली के पास यह एचपीएमसी के जमीन है, इसे जीएडी को दे दिया है। इस जमीन पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। अब हिमाचल प्रदेश का सेब भी आजादपुर मंडी की बजाए चंडीगढ़, परवाणू सहित अन्य मंडियों में जा रहा है।

इसलिए बागवानी कार्यों के लिए भी इस जमीन की उपयोगिता नहीं रह गई है। इस बारे में कोर्ट में केस चल रहा है, जिस पर पैरवी की फीस देनी पड़ रही है। इसकी निगरानी के लिए अभी तक 65 लाख रुपये खर्च हो गए हैं। सीएम ने कहा कि विपक्ष मेहरबानी करके गलत बात न करे, यह व्यावहारिक नहीं है।
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