आठ एनओसी की जगह उद्योग विभाग एकमात्र स्वीकार्यता प्रमाणपत्र देगा और उसको लेकर ही उद्योग स्थापित होंगे। उद्योगों के कार्यरूप में आने पर ही तमाम अनापत्तियां लेनी होगी। विपक्ष का यही सवाल था कि जब छह मंजिल का भवन बन जाएगा तो उसे गिराने का क्या औचित्य होगा।
यही इस कानून की खामी है, जबकि सत्तापक्ष दोहराता रहा कि विपक्ष हिमाचल की आमदनी का जरिया बनाने, देश-दुनिया के उद्योगपतियों को हिमाचल लाने और बेरोजगारों को रोजगार देने का सरकार का रास्ता रोक रहा है।
इसी धींगामुश्ती से जाहिर है कि शनिवार को तपोवन सरकार के धर्मशाला से शिमला विदा होने से पहले भी खूब तपेगा। उद्योगपतियों को तीन साल तक या उद्योगों के कार्यरूप में आने तक जिन आठ कानूनों के तहत एनओसी नहीं लेने होंगे वे यह हैं -
-हिमाचल प्रदेश पंचायती राज एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल कारपोरेशन एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल एक्ट 1994
-हिमाचल प्रदेश फायर फाइटिंग सर्विसेज एक्ट 1984
-हिमाचल प्रदेश रोड साइड लैंड कंट्रोल एक्ट 1968
-हिमाचल प्रदेश शॉप्स एंड कॉमर्शियल एस्टेबलिशमेंट एक्ट 1969
-हिमाचल प्रदेश सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 2006
-हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट 1977