तीन साल हो गए हैं। बर्फ में भी खड़ी है और ठंड में रह लेती है। हिमाचल की स्थानीय पहाड़ी गायों के बारे में पूछने पर राज्यपाल बोले कि पहाड़ी गायों में कोई अन्य कमी नहीं है। केवल दूध कम यानी दो लीटर ही देती हैं। इनमें खर्चा ज्यादा और आय कम होती है। जो गाय दस-बारह लीटर दूध देगी, उसे लोग दूध के लिए पाल लेंगे।
आगे फिर हम टॉप नस्लों का सीमन मंगवाएंगे, जिससे अगली जो प्रजातियां होंगी वे उनसे भी बेहतर होंगी। उन्होंने कहा कि हमारी देसी गाय साहिवाल, गिर, हरियाणवी, रेड सिंधी आदि हैं। ये भारतीय नस्लें हैं।
राज्यपाल बोले कि सबसे ज्यादा उन्हें लगता है कि रेड सिंधी गाय ही पूरी कामयाब है। साहिवाल कम कामयाब है। गिर पांवटा और ऊना में कामयाब है। जर्सी गाय और हमारी गाय पर आस्ट्रेलिया और स्विटजरलैंड में शोध हुए हैं। जर्सी दूध बेशक ज्यादा देती है, उसमें वह गुणवत्ता नहीं है। देसी गाय 40 से 45 लीटर तक दूध दे सकती है।
सेब बागवान एक बार आजमाएं तो सही, कीटनाशक बंद हो जाएंगे
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि फसलों पर कीटनाशकों के इस्तेमाल से लोगों को कैंसर जैसे रोग हो रहे हैं। सेब बागवानी के लिए भी रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल जरूरी नहीं है। बागवान एक बार आजमाएं तो सही। वे अगर गोमूत्र, नीम आदि से बना छिड़काव करें तो इसके कई लाभ होंगे। इससे उनकी फसल भी महंगी बिकेगी।