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Shimla News: सरकार को तीन साल में भेजे 22 प्रस्ताव, एक को भी मंजूरी नहीं

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नगर निगम सदन में पेश रिपोर्ट से खुलाशा
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पार्षद बोले, प्रस्ताव फांक रहे धूल, यह जनता का अपमान

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कांग्रेस की डबल इंजन सरकार में भी नगर निगम के हाथ खाली है। निगम की ओर से भेजे जा रहे प्रस्तावों की फाइलें शहरी विकास विभाग से लेकर प्रदेश सचिवालय में धूल फांक रही हैं। इन प्रस्तावों को सरकार मंजूरी नहीं दे रही है।

हालत यह है कि तीन साल के भीतर अब तक नगर निगम 22 प्रस्ताव सरकार को भेज चुका है। इनमें से एक पर भी अभी तक मंजूरी नहीं आई है। कांग्रेस पार्षद रामरत्न वर्मा की ओर से शनिवार को नगर निगम सदन में पूछे सवाल के जवाब से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पार्षद ने पूछा था कि तीन साल में निगम ने कितने प्रस्ताव सरकार को भेजे हैं, यह कहां अटके हैं और कितने प्रस्ताव पर मंजूरी मिल चुकी है। लिखित जवाब में निगम प्रशासन ने कहा कि 22 प्रस्ताव अब तक सरकार को भेजे गए हैं। ज्यादातर प्रस्ताव विभागों के पास लंबित है। यह प्रस्ताव आम जनता को सुविधा देने से लेकर नगर निगम की आय बढ़ाने से जुड़े हैं। इनमें शहर की संकरी सड़कों के लिए छोटी बसें खरीदने, बिजली बिल की दरों में राहत देने जैसे अहम प्रस्ताव भी शामिल हैं जिन्हें मंजूरी नहीं मिली है। पार्षदों ने सवाल उठाए कि आखिर प्रस्ताव पारित करने का क्या फायदा यदि यह विभागों के पास लटक रहे हैं। आयुक्त ने कहा कि अब सदन से पारित हर प्रस्ताव की हर माह रिपोर्ट ली जाएगी। पार्षद सुषमा कुठियाला के सवाल पर सदन ने फैसला लिया कि आजीविका भवन में दुकानें छोड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। जिन दुकानदारों को इस भवन में दुकानें दी हैं, उन्हें शहर में दूसरी जगह दुकानें लगाने की अनुमति नहीं होगी।
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नाराज पार्षद का सदन में समिति से इस्तीफा
नगर निगम ने विभिन्न समितियों का पुनर्गठन किया है। वित्त संविदा समिति में अब पार्षद सिमी नंदा, रचना भारद्वाज, अंकुश वर्मा, कुसुम ठाकुर सदस्य होंगे। साधारण कृत्यकारक समिति में शीनम कटारिया, विशाखा मोदी, रचना शर्मा, अतुल गौतम जबकि सामाजिक न्याय समिति में आशा शर्मा, कांता सुयाल, चमन प्रकाश, उर्मिला कश्यप को सदस्य बनाया है। टैक्स समिति में पार्षद कुलदीप ठाकुर, विनीत शर्मा सदस्य होंगे। समिति के पुनर्गठन में मनमर्जी से नाम चुनने से नाराज पार्षद कमलेश मेहता ने सदन में ही जैव विविधता समिति से इस्तीफा दे दिया। बाकी पार्षदों ने भी गठन पर सवाल उठाए। मेयर ने कहा कि सभी को मौका दिया गया है।
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